सावन शिवरात्रि पर जरूर करें इस विधि से पूजा...तुरंत दिखेगा परिणाम
सावन शिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा-आराधना करना अत्यधिक फलदायी होता है. सावन शिवरात्रि पर महादेव अपनी भक्तों पर विशेष कृपा बनाए रखते हैं. बाकि शिवरात्रि से काफी अलग होता है सावन शिवरात्रि. इसलिए इसकी पूजा विधि भी काफी अलग है लेकिन इस महीने लोगों के मन में इसकी व्रत की तारीख को लेकर काफी सस्पेंस है. पढ़िए पूरी खबर और जानिए कब रख सकते हैं शिवरात्रि का उपवास और कैसे करें पूजा.
श्रावण महीने यानी सावन का महीना भगवान भोलेनाथ को समर्पित होता है. इस महीने भक्त पूरे मनोभाव से भगवान शिव की पूजा-आराधना करते हैं. हर महीने पड़ने वाली शिवरात्रि को मासिक शिवरात्रि कहते हैं और सावन के महीने में आने वाली शिवरात्रि को सावन शिवरात्रि कहलाती है. मान्यता अनुसार सावन शिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा-आराधना करना अत्यधिक फलदायी होता है. सावन शिवरात्रि पर महादेव अपनी भक्तों पर विशेष कृपा बनाए रखते हैं लेकिन इस साल सावन शिवरात्रि को लेकर लोगों के मन में बहुत उलझन है कि आखिर सावन शिवरात्रि है कब.
पंचांग के मुताबिक सावन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन सावन शिवरात्रि पड़ने वाली है. इस साल सावन महीने में यह तिथि 2 अगस्त की दोपहर 3 बजकर 26 मिनट पर शुरू होगी और इस तिथि का समापन 3 बजकर 50 मिनट पर हो जाएगा. इस वजह से इस साल सावन शिवरात्रि 2 अगस्त के दिन रखा जाएगा.
कब है सावन शिवरात्रि?
सावन शिवरात्रि की पूजा का रात्रि प्रथम प्रहर का मुहूर्त शाम 7:11 से 9:49 बजे तक रहेगा. रात्रि का द्वितीय प्रहर का शुभ मुहूर्त 09:49 रात से 12:27 ( 3 अगस्त) को है. इसके बाद रात्रि का तीसरे प्रहर की पूजा का शुभ मुहूर्त 12:27 से 03:06 एएम, (3 अगस्त) और चतुर्थ प्रहर का शुभ मुहूर्त 03:06 से 05:44 3 अगस्त को है. इसके बाद पूजा का चतुर्दशी मुहूर्त 2 अगस्त को दोपहर 3 बजकर 26 मिनट से शुरू हो रहा है और इसका समापन 3 अगस्त दोपहर 3 बजकर 50 मिनट पर हो जाएगा.
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ऐसे करें सावन शिवरात्रि की पूजा
यह पूजा में फूल, शहद, दही, धतूरा, बेलपत्र, रोली, दीपक, पूजा के बर्तन और साफ जल समेत गंगाजल से की जाती है. इस दिन प्रात: काल उठकर अपने नजदीकी शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव को कच्चे दूध और गंगाजल से जलाभिषेक करें. इसके बाद एक-एक करके पूजा की सभी सामग्री भगवान पर अर्पित कर दीजिए. उसके बाद देसी घी का दीपक भगवान के सामने जला कर प्रार्थना कर लें. शिव पूजा का समापन करने के लिए भगवान भोलेनाथ को भोग लगाने के बाद शिव आरती और शिव मंत्रों का जाप कर लीजिए.