रिश्ता बनते-बनते टूट जा रहा है? इस मंदिर में होता है चमत्कार! यहां पूजा करने से दूर हो सकती हैं विवाह की बाधाएं
तमिलनाडु के थिरुविदंथई स्थित नित्यकल्याण पेरुमल मंदिर को विवाह संबंधी मनोकामनाओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि यहां श्रद्धापूर्वक पूजा और विशेष माला विधि का पालन करने से विवाह में आने वाली बाधाएं दूर हो सकती हैं.
नई दिल्ली: विवाह हर परिवार के लिए जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है. जब रिश्ते बार बार टूटने लगें या शादी में लगातार अड़चनें आने लगें, तो कई लोग धार्मिक आस्था का सहारा लेते हैं. ऐसे ही विश्वास का एक प्रमुख केंद्र तमिलनाडु का नित्यकल्याण पेरुमल मंदिर है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु विवाह की मनोकामना लेकर पहुंचते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर में भगवान विष्णु के नित्यकल्याण पेरुमल स्वरूप की पूजा की जाती है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से पूजा और निर्धारित विधि का पालन करने से विवाह संबंधी बाधाएं दूर हो सकती हैं. हालांकि, यह पूरी तरह धार्मिक आस्था और मान्यता पर आधारित विश्वास है.
भगवान के 'नित्य विवाह' से जुड़ी है अनोखी मान्यता
थिरुविदंथई में स्थित यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है. यहां वे वराह स्वरूप में नित्यकल्याण पेरुमल के रूप में विराजमान हैं. यह मंदिर 108 दिव्य देशमों में शामिल माना जाता है. धार्मिक कथा के अनुसार, ऋषि कालवा की 360 पुत्रियों से भगवान ने 360 दिनों तक प्रतिदिन एक एक विवाह किया. इसी कारण उन्हें 'नित्य कल्याण' स्वरूप में पूजा जाता है.
हजारों श्रद्धालु विवाह की कामना लेकर पहुंचते हैं
करीब एक हजार वर्ष पुराने इस मंदिर में हर साल देश के अलग अलग राज्यों से श्रद्धालु पहुंचते हैं. मान्यता है कि जिन युवाओं के विवाह में लगातार बाधाएं आ रही हों, वे यहां विशेष पूजा करते हैं. कई दंपति संतान प्राप्ति की कामना से भी यहां दर्शन करने आते हैं. मंदिर का धार्मिक महत्व इसे विशेष पहचान दिलाता है.
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माला की परंपरा को माना जाता है खास
मंदिर में विशेष पूजा के दौरान श्रद्धालु अर्चना करवाकर दो मालाएं लेते हैं. पूजा के बाद पुजारी माला वापस देते हैं, जिसे कुछ समय के लिए कमर पर बांधने और फिर मंदिर की नौ परिक्रमा करने की परंपरा बताई जाती है. इसके बाद माला को घर के पूजा स्थल में रखा जाता है. यह पूरी प्रक्रिया धार्मिक मान्यताओं का हिस्सा है.
विवाह तय होने पर फिर लौटते हैं श्रद्धालु
मान्यता है कि विवाह तय होने के बाद श्रद्धालु दोबारा मंदिर पहुंचते हैं. इस दौरान नई माला और अर्चना के साथ पूजा की जाती है तथा पहले वाली माला मंदिर के स्थल वृक्ष के नीचे श्रद्धापूर्वक अर्पित की जाती है. भक्त इसे भगवान के प्रति आभार व्यक्त करने की परंपरा मानते हैं.
आस्था और विश्वास से जुड़ा है यह मंदिर
नित्यकल्याण पेरुमल मंदिर से जुड़ी सभी मान्यताएं धार्मिक विश्वास पर आधारित हैं. बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां भगवान विष्णु का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं और जीवन में सुखद वैवाहिक जीवन की कामना करते हैं. मंदिर की अनोखी परंपरा और प्राचीन इतिहास इसे दक्षिण भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों में विशेष स्थान दिलाते हैं.