क्या जन्माष्टमी के लिए लकड़ी का झूला खरीदना है? पहले जान लें क्या है पंचक का नियम
जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी और इस बार पंचक 1 सितंबर की तड़के समाप्त होगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार समय उपलब्ध हो तो लकड़ी का नया झूला पंचक समाप्त होने के बाद खरीदना बेहतर माना जाता है.
नई दिल्ली: जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी. घरों में लड्डू गोपाल के जन्मोत्सव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. इसी बीच पंचक को लेकर कई लोगों के मन में सवाल है कि क्या जन्माष्टमी के लिए लकड़ी का झूला पंचक में खरीदा जा सकता है. पंचांग के अनुसार इस बार पंचक 27 अगस्त 2026 की दोपहर से शुरू हुआ है और 1 सितंबर की तड़के समाप्त होगा. जन्माष्टमी 4 सितंबर को है. ऐसे में झूला खरीदने के लिए पंचक समाप्त होने के बाद पर्याप्त समय उपलब्ध रहेगा.
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार पंचक उस अवधि को कहा जाता है जब चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र के अंतिम भाग के साथ शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों से गुजरता है. यह अवधि करीब पांच दिन की होती है. लोक मान्यताओं में पंचक के दौरान लकड़ी, घास, उपले और अन्य ज्वलनशील वस्तुओं का बड़ी मात्रा में भंडारण करने से बचने की सलाह दी जाती है. इस दौरान घर की छत डलवाने, चारपाई बुनने या नया पलंग बनवाने जैसे कार्यों को भी टालने की परंपरा है.
क्या पंचक में कान्हा का झूला खरीद सकते हैं?
अगर परिवार की परंपरा में पंचक के दौरान लकड़ी की वस्तु खरीदने से बचने का नियम नहीं है तो पूजा के लिए छोटा लकड़ी का झूला खरीदने को लेकर डरने की जरूरत नहीं है. फिर भी अगर आप धार्मिक मान्यताओं का पूरी तरह पालन करना चाहते हैं तो 1 सितंबर को पंचक समाप्त होने के बाद झूला खरीदना बेहतर विकल्प रहेगा.
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पंचक में झूले की डिलीवरी आ जाए तो क्या करें?
अगर झूला पंचक शुरू होने से पहले ऑनलाइन ऑर्डर कर दिया गया था और उसकी डिलीवरी पंचक के दौरान हो जाती है तो उसे लेने से मना करना जरूरी नहीं है. आप झूले को घर में सुरक्षित रख सकते हैं.
नया झूला बनवाना हो तो क्या करें?
तैयार झूला खरीदने और कच्ची लकड़ी मंगाकर नया झूला बनवाने में अंतर है. अगर बढ़ई से बिल्कुल नया झूला बनवाना है और काम को टाला जा सकता है तो पंचक समाप्त होने के बाद काम शुरू करवाना बेहतर माना जाता है. अगर झूला पहले से बनना शुरू हो चुका है तो केवल पंचक के कारण उसे बीच में रोकना जरूरी नहीं माना जाता. नई शुरुआत और पहले से चल रहे काम को पूरा करने की धार्मिक मान्यताएं अलग हो सकती हैं.
धातु और प्लास्टिक के झूले पर क्या है नियम?
लकड़ी से जुड़ी पारंपरिक मान्यताएं धातु, पीतल, चांदी या प्लास्टिक के छोटे पूजा झूले पर उसी तरह लागू नहीं होतीं. ऐसे झूले पंचक में खरीदे जा सकते हैं. हालांकि, झूला खरीदते समय उसकी मजबूती और सुरक्षा का ध्यान जरूर रखें. झूले के किनारे नुकीले नहीं होने चाहिए और उसमें लड्डू गोपाल की प्रतिमा सुरक्षित तरीके से रखी जा सके.
ध्यान रखें कि पंचक से जुड़ी ये बातें धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं. इनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. जन्माष्टमी पर सबसे महत्वपूर्ण भगवान कृष्ण के प्रति श्रद्धा, स्वच्छता और भक्ति का भाव माना जाता है.