Falgun Maas 2026: हिंदू कैलेंडर का अंतिम महीने में एक गलती जिंदगी कर सकती है बर्बाद, यहां जानें क्यों है सावधान रहने की जरूरत?
हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास वर्ष का अंतिम और अत्यंत पवित्र महीना माना जाता है. साल 2026 में इसकी शुरुआत 2 फरवरी से हो रही है. इस महीने कुछ कार्यों से बचना और कुछ शुभ कर्म करना विशेष फलदायी माना गया है.
हिंदू कैलेंडर में फाल्गुन मास को विशेष आध्यात्मिक महत्व प्राप्त है. यह साल का आखिरी महीना होता है और ऋतु परिवर्तन का संकेत देता है. मान्यता है कि इस समय प्रकृति में नया जीवन संचारित होता है और मनुष्य के भीतर भी आत्मशुद्धि की प्रक्रिया तेज होती है. साल 2026 में फाल्गुन मास की शुरुआत 2 फरवरी सोमवार से हो रही है. फाल्गुन मास को भक्ति और आनंद का महीना कहा जाता है. इसी दौरान होली और महाशिवरात्रि जैसे बड़े पर्व आते हैं. ये पर्व केवल उत्सव नहीं बल्कि आत्मिक जागरण और बुराइयों से मुक्ति का संदेश देते हैं. शास्त्रों के अनुसार इस महीने जप तप और संयम से किए गए कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है.
फाल्गुन मास में होली से लगभग आठ दिन पहले होलाष्टक लगते हैं. इस अवधि को मांगलिक कार्यों के लिए अशुभ माना गया है. विवाह गृह प्रवेश नामकरण और मुंडन जैसे संस्कार इस समय नहीं करने चाहिए. मान्यता है कि होलाष्टक काल में किए गए शुभ कार्यों में रुकावट और बाधाएं आती हैं.
फाल्गुन मास में तामसिक भोजन से बनाए दूरी
फाल्गुन मास में खानपान पर विशेष ध्यान देना जरूरी माना गया है. मांस मदिरा अंडा प्याज और लहसुन जैसे तामसिक आहार से दूरी रखने की सलाह दी जाती है. यह महीना शरीर और मन दोनों की शुद्धि का होता है. तामसिक भोजन से मानसिक अशांति और नकारात्मक विचार बढ़ सकते हैं जो साधना में बाधा बनते हैं.
शास्त्रों में कहा गया है कि फाल्गुन मास में क्रोध ईर्ष्या और अहंकार से बचना चाहिए. गुस्सा और घमंड मन को अशांत करते हैं और व्यक्ति को पुण्य से दूर ले जाते हैं. संयम विनम्रता और शांति से किया गया व्यवहार ही इस पवित्र महीने का वास्तविक फल देता है.
फाल्गुन माह में जरूर करें ये शुभ कार्य
फाल्गुन मास केवल वर्जनाओं का नहीं बल्कि सकारात्मक कर्मों का भी समय है. इस महीने किए गए शुभ कार्य जीवन में सुख और शांति लाते हैं. फाल्गुन मास में दान को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है. अन्न वस्त्र धन और जरूरतमंदों की सहायता करने से ग्रह दोषों में कमी आती है. मान्यता है कि इस महीने किया गया दान व्यक्ति के जीवन से कई बाधाओं को दूर करता है. इस महीने नियमित पूजा पाठ और मंत्र जप का विशेष महत्व है. मान्यता है कि इस समय किया गया जप मनोकामनाओं की पूर्ति करता है. खास तौर पर महाशिवरात्रि के दिन रुद्राभिषेक और होली के आसपास भक्ति भाव से की गई साधना अत्यंत फलदायी मानी जाती है.
फाल्गुन मास में सात्विक जीवनशैली अपनाने की सलाह दी जाती है. नियमित स्नान स्वच्छता ध्यान और साधना से मानसिक शांति मिलती है. सरल भोजन और संयमित दिनचर्या से शरीर और मन दोनों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. यह महीना आत्मचिंतन का भी अवसर देता है. पूरे वर्ष किए गए कर्मों पर विचार कर आने वाले नए वर्ष के लिए संकल्प लेने का यही सही समय माना गया है. फाल्गुन मास व्यक्ति को पुराने बोझ से मुक्त होकर नई शुरुआत के लिए तैयार करता है.