Chaitra Navratri 2026: आज बन रहा है शुभ योग, नवरात्रि के पांचवें दिन ऐसे करें मां स्कंदमाता की पूजा, मिलेगा मनचाहा फल!
चैत्र नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा का विशेष महत्व है. जानिए जानते हैं इस दिन की पूजा विधि, शुभ योग और मंत्र से मिलने वाले लाभ.
चैत्र नवरात्रि के पांचवें दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है. स्कंदमाता का अर्थ है भगवान कार्तिकेय की माता. उनकी गोद में बाल रूप में कार्तिकेय विराजमान रहते हैं. मां कमल के पुष्प पर विराजमान होती हैं, इसलिए उन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है. मान्यता है कि जो भक्त मां स्कंदमाता की पूजा करता है, उसे मां के साथ ही भगवान कार्तिकेय का आशीर्वाद भी मिलता है.
इस साल नवरात्रि के पांचवें दिन विशेष शुभ संयोग बन रहा है. आज सर्वार्थसिद्धि योग और रवि योग का निर्माण हो रहा है. सर्वार्थसिद्धि योग रात 8 बजकर 49 मिनट से शुरू होकर अगले दिन सुबह 6 बजकर 21 मिनट तक रहेगा.
मां स्कंदमाता की सरल पूजन विधि
मां स्कंदमाता की पूजा करने के लिए कुछ आसान नियमों का पालन करना चाहिए. सबसे पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें. यदि संभव हो तो पीले रंग के कपड़े पहनें. पूजा स्थान को साफ करें और मां की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें. इसके बाद घी का दीपक जलाएं और मां को पीले फूल अर्पित करें. उन्हें पीले रंग के भोग जैसे केले या मिठाई अर्पित करें. पूजा के आखिर में अपनी मनोकामना विशेष रूप से संतान सुख से जुड़ी प्रार्थना जरूर करें. ऐसा करने से परिवार में सुख शांति और समृद्धि आती है.
विशुद्ध चक्र से जुड़ा है मां का संबंध
तंत्र साधना के अनुसार मां स्कंदमाता का संबंध विशुद्ध चक्र से माना जाता है. यह चक्र कंठ के पीछे स्थित होता है और वाणी तथा अभिव्यक्ति से जुड़ा होता है. ज्योतिष के अनुसार इनका संबंध बृहस्पति ग्रह से भी जोड़ा जाता है, जो संतान सुख और ज्ञान का कारक माना जाता है.
जब विशुद्ध चक्र कमजोर होता है तो व्यक्ति को बोलने में परेशानी हो सकती है. जैसे हकलाना या अपनी बात ठीक से व्यक्त न कर पाना. इसके अलावा गले, कान और नाक से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं. व्यक्ति का आत्मविश्वास कम हो सकता है और उसकी क्षमताओं का पूर्ण विकास नहीं हो पाता.
ऐसे करें चक्र को मजबूत करने की साधना
रात के समय शांत स्थान पर बैठकर मां स्कंदमाता का ध्यान करें. घी का दीपक जलाएं और देवी को लाल चंदन का तिलक लगाएं. इसके बाद वही तिलक अपने कंठ पर भी लगाएं. ध्यान करते समय अपने विशुद्ध चक्र पर प्रकाश या बिंदु की कल्पना करें. फिर मां के मंत्र का 108 बार जाप करें. नियमित रूप से ऐसा करने से धीरे धीरे आत्मविश्वास और वाणी में सुधार होने लगता है.
मां स्कंदमाता को प्रसन्न करने के लिए यह मंत्र बेहद प्रभावी माना जाता है
ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे
इस मंत्र का श्रद्धा और विश्वास के साथ जाप करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है और बाधाएं दूर होती हैं.