27 या 28 मई कब है बकरीद का त्योहार? यहां जानें सही तारीख
बकरीद को बकरा ईद या कुर्बानी का त्योहार भी कहते हैं. यह इस्लामी कैलेंडर के आखिरी महीने जिलहिज्जा की 10वीं तारीख को मनाया जाता है. इस दिन हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की अल्लाह के प्रति आज्ञाकारिता और कुर्बानी की याद में जानवर की कुर्बानी दी जाती है.
मुसलमानों का दूसरा सबसे बड़ा त्योहार बकरीद (ईद-उल-अजहा) इस साल मई के अंत में मनाया जाएगा. जानकारों के अनुसार 2026 में बकरीद 27 मई (बुधवार) को होने की सबसे ज्यादा संभावना है. कुछ जगहों पर यह 28 मई (गुरुवार) को भी हो सकती है. लेकिन अंतिम फैसला चांद दिखने के बाद ही होगा.
बकरीद को बकरा ईद या कुर्बानी का त्योहार भी कहते हैं. यह इस्लामी कैलेंडर के आखिरी महीने जिलहिज्जा की 10वीं तारीख को मनाया जाता है. इस दिन हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की अल्लाह के प्रति आज्ञाकारिता और कुर्बानी की याद में जानवर की कुर्बानी दी जाती है.
इस्लामी त्योहार चांद के दीदार पर निर्भर करते हैं. इसलिए हर साल इनकी तारीख बदलती रहती है. इस बार जिलहिज्जा 1447 हिजरी का महीना शुरू होने की उम्मीद 18 मई 2026 से है. अगर चांद 18 मई की शाम को दिख गया तो जिलहिज्जा की पहली तारीख 19 मई होगी. ऐसे में 10वीं तारीख 27 मई 2026 को पड़ेगी.
मौलानाओं और चांद देखने वाले जानकारों का कहना है कि 17 मई को चांद दिखने की संभावना बहुत कम है. भारत में उस दिन चांद की ऊंचाई केवल 9 डिग्री के आसपास रहने की उम्मीद है. जबकि 18 मई को चांद की ऊंचाई 23 डिग्री से ज्यादा हो जाएगी, जिससे चांद आसानी से दिख सकता है.
एक प्रमुख मौलाना ने कहा- 'हमेशा की तरह बकरीद की तारीख चांद के दीदार पर ही तय होगी. अभी 27 मई की सबसे ज्यादा संभावना है, लेकिन Ruet-e-Hilal कमिटी की आधिकारिक घोषणा के बाद ही पक्का होगा. मुसलमानों को 17 और 18 मई की शाम को चांद देखने की कोशिश करनी चाहिए.' बकरीद के मौके पर लोग नमाज अदा करते हैं, कुर्बानी देते हैं और गरीबों में गोश्त बांटते हैं. यह त्योहार भाईचारे, त्याग और अल्लाह की इबादत का संदेश देता है.
देशभर में मुसलमान इस पवित्र त्योहार का इंतजार कर रहे हैं. सरकार की ओर से भी 27 मई को गजेटेड छुट्टी घोषित किए जाने की उम्मीद है. कुछ राज्यों में छुट्टी 28 मई को भी हो सकती है. अभी से तैयारियां शुरू हो गई हैं.