Assembly Election 2026 West Bengal Assembly Election 2026

काउंटिंग कलः देश की राजनीति को निर्णायक मोड़ पर ले जाएंगे बंगाल चुनाव के नतीजे!

बंगाल असेंबली चुनाव कई मामलों में अहम रहने वाला है। यह एसआईआर पर जनमत का काम करेगा तो क्षेत्रीय के साथ ही देश की राजनीति में का भविष्य भी तय करेगा।

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Sagar Bhardwaj

नई दिल्लीः कल पांच राज्यों के असेंबली इलेक्शन में मतगणना होगी. पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी को नई सरकारें मिलेंगी, लेकिन सियासी गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा पश्चिम बंगाल की है. केवल चर्चा ही नहीं पश्चिम बंगाल ही वह राज्य है जहां के चुनाव परिणाम देश की राजनीति को निर्णायक मोड़ पर ले जाएंगे. पश्चिम बंगाल ही सही मायने में एसआईआर को लेकर जनमत का काम करेगा और देश की राजनीति का भविष्य भी तय करेगा. 

कैसे देश की राजनीति को निर्णायक मोड़ देगा बंगाल?

दरअसल, फिलहाल पश्चिम बंगाल को ही देश की राजनीति में विपक्ष का सबसे बड़ा किला माना जा रहा है. 2011 से बंगाल की सत्ता पर तृणमूल कांग्रेस का कब्जा है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बीजेपी के खिलाफ सबसे अधिक मुखर भी रहती हैं. एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ते हुए अपने तल्ख अंदाज से उन्होंने पूरे देश का ध्यान खींचा.  विपक्ष का ऐसा मजबूत किला भी ध्वस्त हो गया तो बीजेपी की राह काफी आसान हो जाएगी. इसके उलट, ममता बनर्जी की सत्ता में वापसी बीजेपी के लिए आने वाले चुनावों में चुनौतियां बढ़ सकती हैं. दरअसल बंगाल के नतीजे देश की राजनीति का नैरेटिव तय करने का काम भी करेंगे.

बीजेपी में अधिक वोटिंग को लेकर उत्साह

इस बार बीजेपी बंगाल में हुई अधिक वोटिंग को लेकर उत्साह में है. करीब 93 परसेंट वोटिंग कर बंगाल ने बड़ा लैंड मार्क बनाने का काम तो किया ही है, लेकिन सियासी जानकार इसका कारण एसआईआर को मान रहे हैं, जाहिर तौर पर हाल में ही वोटर लिस्ट अपडेट हुई है तो उसकी एक्यूरेसी बढ़ी है और परिणाम अधिक वोटिंग के रूप में सामने है. एसआईआर के दौरान करीब 88 लाख वोट कम हुए हैं, इनमें से 60 लाख वोटर्स दर्ज पते पर नहीं मिले या मौत हो गई. करीब 27 लाख वोटर्स की वैद्यता विचाराधीन है. ममता बनर्जी ने एसआईआर प्रक्रिया को मनमाना बताते हुए विरोध किया तो बीजेपी ने इसे जरूरी सफाई बताते हुए समर्थन किया. चुनाव परिणामों पर इसका क्या असर होगा, 4 मई को साफ हो जाएगा.

एग्जिट पोल्स को झुठलाता रहा है पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर आए एग्जिट पोल बीजेपी को बढ़त या फिर कड़ा मुकाबला बता रहे हैं. पश्चिम बंगाल एग्जिट पोल का झुठलाता भी रहा है. 2021 असेंबली इलेक्शन में भी एग्जिट पोल बीजेपी को बढ़त बता रहे थे लेकिन हुआ उल्टा. टीएमसी ने 215 सीटें जीतकर तीसरी बार सत्ता में वापसी की थी और बीजेपी को मात्र 77 सीटों पर समेट दिया था. हालांकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नंदीग्राम से बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी के हाथों हार गई थीं, बाद में ममता बनर्जी भवानीपुर सीट से उप- चुनाव में चुनी गईं, इस बार भी ममता बनर्जी भवानीपुर से ही चुनाव लड़ीं और बीजेपी ने भी उनके सामने सुवेंदु अधिकारी को चुनाव मैदान में उतार दिया.

उत्तर में बीजेपी, दक्षिण में टीएमसी का गढ़

2019 के बाद उत्तरी बंगाल में बीजेपी मजबूत हुई है. 2021 में भी जलपाईगुड़ी और कूच बिहार जैसे जिलों में बीजेपी बढ़त पर रही, लेकिन दक्षिण बंगाल में टीएमसी का गढ़ है.1977 से 2011 तक बंगाल में एक छत्र राज करने वाला वाम मोर्चा बंगाल से पूरी तरह साफ हो चुका है। 2021 में उसके जीरो पर आउट होने के बाद लड़ाई टीएमसी और बीजेपी के बीच सीधी हो गई है. यह चुनाव भी इसी समीकरण पर रहने की उम्मीद है. बाकी, सोमवार को मतगणना के बाद साफ हो जाएगा, लेकिन इतना तय है कि बीजेपी इस बार भी चूक गई तो इसका असर आने वाले चुनावों पर साफ दिखेगा.