पश्चिम बंगाल में BJP की जीत के बाद बांग्लादेश के साथ सुधरेंगे संबंध? तारिक रहमान सरकार ने तीस्ता समझौते पर जताई उम्मीद
पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की जीत पर बांग्लादेश की तारिक रहमान सरकार ने खुशी जाहिर की है. उन्होंने तीस्ता प्रोजेक्ट पर एक बार फिर से समझौते की उम्मीद जताई है.
पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की मिली जीत की चर्चा विदेशों तक हो रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई दी है. वहीं पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश ने भी इस जीत का स्वागत किया है. बांग्लादेश की सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने कहा कि इस परिवर्तन से दोनों देशों के बीच लंबे समय से अटकी जल-बंटवारे का मुद्दा सुलझ सकता है.
BNP ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार पर तीस्ता नदी के पानी के बंटवारे के समझौते को रोकने का आरोप लगाया है. पार्टी के सूचना सचिव अजीजुल बारी हेलाल ने शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में BJP के शानदार प्रदर्शन की प्रशंसा की.
BNP ने ममता सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
बीएनपी के सूचना सचिव ने कहा कि पश्चिम बंगाल में आए इस नतीजे से दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत होने की उम्मीद है. हेलाल ने मीडिया से बातचीत में उम्मीद जताई कि नई राजनीतिक व्यवस्था ढाका और नई दिल्ली के बीच लंबे समय से अटके तीस्ता जल-बंटवारा समझौते को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ करेगी.
उन्होंने सीएम ममता बनर्जी पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे हमेशा इस समझौते की मुख्य बाधा रही हैं. उनके अनुसार तीस्ता बैराज निर्माण पर सीएम बनर्जी ने अड़चनें खड़ी की है. अब राज्य में बीजेपी सरकार और केंद्र की सरकार के ताल मेल से इस मुद्दे पर समझौता संभव है.
ममता बनर्जी की हार से बांग्लादेश में क्यो खुश?
बांग्लादेश के सत्ताधारी पार्टी के नेताओं को यह उम्मीद है की बंगाल में बीजेपी सरकार के आने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक और अन्य सीमा संबंधी मुद्दे सकारात्मक मोड़ लेंगे. बांग्लादेश और भारत की लंबी सीमा पश्चिम बंगाल से लगती है, जिसका सीधा असर दोनों देशों के रिश्ते पर पड़ता है.
हेलाल ने अब उम्मीद जताई है कि इस रिश्ते में अब सकारात्मक बदलाव आएगा. बता दें कि तीस्ता नदी सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होते हुए बांग्लादेश में इंटर करती है. यह नदी बांग्लादेश के उत्तरी जिलों के किसानों के लिए काफी अहम है. दोनों देश ने 2011 में इसनदी को लेकर समझौता किया था, जिसके तहत भारत को 42.5 प्रतिशत, बांग्लादेश को 37.5 प्रतिशत पानी मिलने का फैसला लिया गया. वहीं 20 प्रतिशत पानी को पर्यावरण के लिए छोड़ा गया. हालांकि ममता सरकार के आने के बाद इस समझौते पर हस्ताक्षर नहीं हो पाए. जिसके कारण बांग्लादेश को काफी नुकसान हुआ. अब उन्हें उम्मीद है कि तीस्ता प्रोजेक्ट पर बात आगे बढ़ सकती है.