तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजे ने सबको चौंका दिया. खंडित जनादेश के कारण राजनीतिक हलचल बढ़ गई है. राज्य में सरकार बनाने के लिए TVK को दूसरी पार्टियों की जरूरत पड़ रही है. वहीं इन सब के बीच AIADMK के भीतर संभावित मतभेद की अटकलें तेज हो गई है.
234 विधानसभा सीटों वाले इस राज्य में सरकार बनाने के लिए टीवीके के विजय को 118 सीटें चाहिए. लेकिन उन्होंने 108 सीटों पर जीत हासिल की है, ऐसे में अभी भी उनके पास 10 सीटें कम है. जिसे पूरा करने की लिए अलग-अलग पार्टियों से समर्थन मांग रहे हैं. हालांकि इसी बीच AIADMK के कई विधायकों ने टीवीके को समर्थन देने का फैसला लिया है. जिसके कारण पार्टी के अंदर हलचल तेज हो गई है.
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक AIADMK के 47 विधायकों में से लगभग 30 विधायकों ने टीवीके को समर्थन देने का फैसला लिया है. हालांकि पार्टी के वरिष्ठ नेता सीवी शनमुगम नेताओं से बातचीत कर रहे हैं. लेकिन कहा जा रहा है कि अगर पार्टी जल्द कोई फैसला नहीं लेती है तो ये विधायक विजय को अपना समर्थन सौंप देंगे.
इसी बीच सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, विजय आज दोपहर 2 बजे तक लोक भवन पहुंच सकते हैं, जहां वे सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे. ऐसे समय में एआईएडीएमके के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी पर दबाव बढ़ता जा रहा है. हालांकि पलानीस्वामी ने नरम रुख अपनाते हुए कहा है कि विजय को ही यह तय करना है कि वह क्या स्थिर सरकार बनाना चाहते हैं या नहीं चाहते हैं.
AIADMK से पहले कांग्रेस पार्टी ने टीवीके को 5 सीटों का समर्थन देने का फैसला किया है. हालांकि उनके इस फैसले पर DMK ने कड़ी आलोचना की है. पार्टी के प्रवक्ता सरवनन अन्नादुरई ने कांग्रेस के इस कदम पर हमला बोलते हुए पीठ में छुरा घोंपने का आरोप लगाया है. उनका मानना है कि कांग्रेस ने ऐसा कर के अपना रुख बदल लिया है.
कांग्रेस सबसे पुरानी पार्टी है, वहीं टीवीके सबेस नई पार्टी है, ऐसे में दोनों पार्टियों की विचारधारा और भविष्य में होने वाली परेशानियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं. हालांकि अगर ज्यादा संख्या में एआईएडीएमके के विधायक टीवेके को अपना समर्थन देते हैं तो सरकार बनाने में कांग्रेस की भूमिका उतनी मजबूत नहीं बचेगी. डीएमके का कहना है कि कांग्रेस द्वारा दिया गया तर्क संतोषजनक नहीं है.