असम, केरल, पुडुचेरी में रिकॉर्ड तोड़ मतदान, महिलाओं ने बढ़ चढ़कर लिया हिस्सा
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, पुडुचेरी ने 89.20 प्रतिशत मतदान के साथ बाजी मारी. असम 85.10 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि केरलम में भी 77.50 प्रतिशत लोगों ने वोट डाला.
गुरुवार को तीन राज्यों असम, केरलम और पुडुचेरी में एक साथ हुए विधानसभा चुनावों में लोगों ने रिकॉर्ड तोड़ उत्साह दिखाया. शाम साढ़े सात बजे तक जारी चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, पुडुचेरी ने 89.20 प्रतिशत मतदान के साथ बाजी मारी. असम 85.10 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि केरलम में भी 77.50 प्रतिशत लोगों ने वोट डाला. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, पिनराई विजयन और एन रंगास्वामी सहित कई दिग्गज नेताओं ने सुबह जल्दी ही अपना वोट डाल दिया था. अब सबकी निगाहें 4 मई को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं, जहां तय होगा कि किसकी सरकार बनती है.
पुडुचेरी में सबसे ज्यादा उत्साह
पुडुचेरी के केन्द्र शासित प्रदेश में कुल 30 सीटों के लिए चुनाव हुए. यहां 10,14,070 मतदाताओं ने अपने अधिकार का इस्तेमाल किया, जिनमें 5,39,125 महिलाएं और 4,74,788 पुरुष थे. सबसे दिलचस्प बात यह रही कि यहां के मुख्यमंत्री एन रंगास्वामी ने अपनी पुरानी परंपरा निभाते हुए मोटरसाइकिल पर सवार होकर मतदान केंद्र पहुंचे. पुडुचेरी में 89.20 प्रतिशत का आंकड़ा खास है क्योंकि यहां पिछले चुनावों की तुलना में मतदान बढ़ा है. इस बार चुनावी मुकाबला त्रिकोणीय बनता दिख रहा है. सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन (जिसमें एआईएनआरसी और भाजपा शामिल हैं) को कांग्रेस-डीएमके गठबंधन से कड़ी टक्कर मिल रही है. साथ ही, अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) ने भी इस बार चुनावी मैदान में त्रिकोणीय मुकाबला करने की कोशिश की है. 24,156 युवा मतदाता (18-19 आयु वर्ग) पहली बार चुनाव का हिस्सा बने, जिसने यहाँ के चुनावी माहौल को और रोमांचक बना दिया.
असम में भी उमड़ा जनसैलाब
असम के 126 विधानसभा क्षेत्रों में 85.10 प्रतिशत मतदान हुआ. यहां 2.5 करोड़ से अधिक मतदाता थे, जिनमें 1,25,31,552 पुरुष और 1,25,22,593 महिला वोटर्स शामिल थे. राज्य में 318 ट्रांसजेंडर मतदाताओं ने भी अपनी भागीदारी दर्ज कराई. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सुबह जल्दी मतदान किया और लोगों से अधिक से अधिक वोट डालने की अपील की. यह चुनाव मुख्य तौर पर भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए और कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच माना जा रहा है. चुनाव प्रचार के दौरान दोनों तरफ से जमीनी स्तर पर कड़े हमले हुए और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला. यहाँ 722 उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे. सबसे खास बात यह रही कि यहाँ 2,04,608 मतदाता 85 साल या उससे अधिक उम्र के थे, जिन्होंने घर से बाहर निकलकर लोकतं्रा के इस पर्व में हिस्सा लिया. चुनाव आयोग ने यहाँ 30,471 मतदान केंद्र बनाए थे, ताकि हर नागरिक को सुरक्षित माहौल में वोट डालने का मौका मिल सके.
केरलम में 2.6 करोड़ मतदाताओं ने तय की सरकार
केरलम में 140 विधानसभा सीटों के लिए हुए चुनाव में 77.50 प्रतिशत मतदान हुआ. यहां सबसे ज्यादा मतदाता महिलाएं रहीं. कुल 2,69,53,644 मतदाताओं में से 1,38,27,319 महिलाएं थीं, जबकि पुरुषों की संख्या 1,31,26,048 थी. राज्य में 277 थर्ड-जेंडर मतदाता भी थे. मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने सुबह सबसे पहले वोट डालकर अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को संदेश दिया. इस बार केरलम में मुकाबला काफी दिलचस्प माना जा रहा है.
यूडीएफ (कांग्रेस नीत गठबंधन) पिछले एक दशक से सत्ता में चली आ रही सीपीआईएम के नेतृत्व वाली एलडीएफ सरकार को हटाने के लिए पूरी ताकत लगा रही है. वहीं, भाजपा ने भी इस बार केरलम में अपने पैर जमाने के लिए जोरदार प्रचार किया है, जिससे त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति बन गई है. लगभग 4,24,518 युवा (18-19 आयु वर्ग) पहली बार मतदाता बने. चुनाव आयोग के अधिकारियों ने मतदान समाप्त होते ही ईवीएम और वीवीपैट मशीनों को सील कर दिया. अब सबकी निगाहें 4 मई की तारीख पर टिकी हैं, जब तीनों राज्यों के नतीजे एक साथ आएंगे और यह साफ हो जाएगा कि किसकी सरकार बनती है.