केरल में पिनराई विजयन लगाएंगे हैट्रिक या कांग्रेस करेगी वापसी? जानिए किसके बीच होगी कांटे की टक्कर
केरल में विधानसभा चुनाव के लिए गुरुवार यानी की आज से मतदान की प्रक्रिया शुरु हो गई है. मतदान की शुरुआत होते ही केरल का राजनीतिक माहौल पूरी तरह सक्रिय हो गया है.
केरल में विधानसभा चुनाव के लिए गुरुवार यानी की आज से मतदान की प्रक्रिया शुरु हो गई है. मतदान की शुरुआत होते ही केरल का राजनीतिक माहौल पूरी तरह सक्रिय हो गया है. सुबह 7 बजे से शुरू हुई वोटिंग में मतदाताओं का उत्साह साफ दिखाई दे रहा है.
इस बार का चुनाव न केवल सत्ता के लिए अहम है, बल्कि यह तय करेगा कि क्या राज्य में परंपरा टूटने के बाद सत्तारूढ़ गठबंधन अपनी पकड़ बनाए रख पाता है या नहीं. इस इलेक्शन में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) और कांग्रस नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के बीज सीधी लड़ाई देखने को मिल रही है. हालांकि बीजेपी भी इसमें हिस्सा ले रही है.
राजनीतिक समीकरण
राज्य में चुनावी लड़ाई मुख्य रूप से वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के बीच है. एलडीएफ का नेतृत्व सीपीआई (एम) कर रही है, जबकि यूडीएफ की कमान कांग्रेस के हाथ में है. इसके अलावा भाजपा भी राज्य में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है.
140 सीटों पर 883 उम्मीदवार के बीच जंग
इस चुनाव में 140 सीटों के लिए कुल 883 उम्मीदवार मैदान में हैं, जबकि करीब 2.71 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे. इनमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 1.32 करोड़ से ज्यादा, महिला मतदाताओं की संख्या 1.39 करोड़ से ज्यादा और थर्ड जेंडर के 273 मतदाता शामिल हैं. जिनके लिए करीब 30,000 से ज्यादा मतदाता केंद्र बनाए गए हैं, जहां बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी और चुनाव अधिकारी तैनात हैं.
प्रमुख चेहरे और सीटें
इस इलेक्शन में मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन एक बार फिर कन्नूर की धर्मदम सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, जो उनका मजबूत गढ़ माना जाता है. वहीं विपक्ष के नेता वी. डी. सतीशान परवूर सीट से अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश में हैं. नेमोम सीट पर राजीव चंद्रशेखर का मुकाबला भी खासा दिलचस्प माना जा रहा है.
चुनावी इतिहास और चुनौती
केरल में मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने 2021 में 40 साल पुरानी परंपरा को तोड़ते हुए लगातार दूसरी बार सरकार बनाकर इतिहास रचा था. अब लेफ्ट पार्टी अपनी विकास योजनाओं और अच्छे कामों के भरोसे तीसरी बार सत्ता में वापसी करना चाहती है.
वहीं, कांग्रेस सत्ता पर काबिज होने की कोशिश में जुटी हुई है. दोनों तरफ से जोरदार तैयारी चल रही है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि केरल के आगामी विधानसभा चुनाव किसकी किस्मत बदलते हैं और किसकी सरकार बनती है.