नैनीताल की हवा में PM 2.5 का अटैक, 'नरक' बनी सरोवर नगरी


Reepu Kumari
01 May 2025

नैनीताल नहीं है सेफ

    उत्तराखंड का प्रमुख पर्यटन स्थल नैनीताल अब उतना सुरक्षित नहीं रहा है जितना पहले माना जाता था. आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान अनुसंधान संस्थान (एरीज) की ताज़ा रिसर्च में खुलासा हुआ है.

हवा में महीन कणों की मात्रा में बढ़ोतरी

    नैनीताल की हवा में महीन कणों (PM 2.5) की मात्रा चिंताजनक स्तर तक पहुंच चुकी है जो स्थानीय लोगों और पर्यटकों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकती है.

WHO के निर्धारित मानकों से कहीं अधिक

    नैनीताल की हवा में PM 2.5 का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के निर्धारित मानकों से कहीं अधिक है.

कैंसर का कारण बन सकते हैं

    माइक्रोन से छोटे कण फेफड़ों में गहराई तक जाकर सांस संबंधी बीमारियों, अस्थमा, हृदय रोग और यहां तक कि कैंसर का कारण बन सकते हैं.

सबसे ज्यादा किस पर होगा असर

    विशेषकर बुज़ुर्गों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए यह स्थिति और भी अधिक खतरनाक हो सकती है.

तापमान बढ़ रहा

    बढ़ते प्रदूषण और वाहनों के दबाव के साथ ही गर्मियों के मौसम में लगने वाली जंगलों की आग के कारण तापमान बढ़ रहा है.

पहाड़ों में प्रदूषण की मात्रा

    पहाड़ों में प्रदूषण की मात्रा बढ़ी है, वहीं मैदानी इलाकों का प्रदूषण भी हवा के जरिए पहाड़ों तक पहुंचता है. जिसे ट्रांसपोर्ट पॉल्यूशन कहा जाता है.

तेज आंधी-तूफान

    तापमान बढ़ेगा, प्रदूषण की मात्रा भी बढ़ेगी. तेज आंधी-तूफान के समय PM 2.5 की मात्रा 250 से 300 mg/meter^3 तक मापी गई है.

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