श्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के दो साल पूरे, जानें क्या-क्या हुआ निर्माण
आस्था का नया केंद्र
अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा को दो साल पूरे हो गए हैं. इन दो वर्षों में मंदिर का निर्माण लगातार जारी रहा और आस्था का यह नया केंद्र एक नए स्वरूप में उभरकर सामने आया है.
विभिन्न हिस्सों का निर्माण
मंदिर परिसर के विभिन्न हिस्सों का निर्माण पूरी तरह से पूरा हो चुका है और श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है.
कई छोटे मंदिर
मंदिर के मुख्य गर्भगृह और रंग मंडप सहित राम मंदिर का निर्माण पूरा हो चुका है. इसके चारों ओर लगभग 800 मीटर लंबा परकोटा तैयार किया गया है, जिसमें कई छोटे मंदिर भी शामिल हैं.
सप्त मंडप का निर्माण
मंदिर परिसर में सप्त मंडप का निर्माण भी पूरा हो गया है. महर्षि वाल्मीकि, वशिष्ठ, विश्वामित्र, अगस्त्य, निषादराज, शबरी और ऋषि पत्नी अहल्या के मंदिर बनकर तैयार हैं.
पूर्ण रूप से तैयार
इसके अलावा भगवान शिव, गणेश, हनुमान, सूर्यदेव, मां दुर्गा और मां अन्नपूर्णा के छोटे मंदिर भी पूर्ण रूप से तैयार हो चुके हैं.
कई प्रतिमाएं स्थापित
मंदिर परिसर में जटायु, गिलहरी और संत तुलसीदास की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं. सभी मंदिरों के शिखरों पर कलश और धर्म ध्वज लगाकर इन्हें सजाया गया है, जिससे मंदिर का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व और बढ़ गया है.
शेषावतार लक्ष्मणजी का मंदिर
परकोटे के बाहर शेषावतार लक्ष्मणजी का मंदिर भी बनकर तैयार हो चुका है. इस मंदिर के शिखर पर भी कलश और धर्म ध्वज लगाए गए हैं.
पूर्ण धार्मिक संरचना
यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है और पूरे परिसर को एक पूर्ण धार्मिक संरचना का रूप देता है.