फैटी लिवर को बिना दवा के किया जा सकता है रिवर्स?
क्यों बढ़ रहे हैं फैटी लिवर के मामले?
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में फास्ट फूड, तला-भुना खाना और कम फिजिकल एक्टिविटी आम हो गई है. यही आदतें कम उम्र में भी फैटी लिवर का खतरा बढ़ा रही हैं.
क्या होता है फैटी लिवर?
जब लिवर की कोशिकाओं में जरूरत से ज्यादा फैट जमा होने लगता है, तो इसे फैटी लिवर कहा जाता है.भारत में नॉन-एल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज के मामले बड़ी संख्या में पाए जाते हैं.
किन लोगों को ज्यादा खतरा?
फैटी लिवर का संबंध कई बार मोटापा, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल और खराब लाइफस्टाइल से होता है. इसलिए वजन और खानपान पर नियंत्रण रखना जरूरी है.
क्या बिना दवा फैटी लिवर रिवर्स हो सकता है?
कुछ मामलों में फैटी लिवर को बिना दवा के भी सुधारने में मदद मिल सकती है.यह बीमारी की स्टेज और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है.
ग्रेड-1 फैटी लिवर में क्या करें?
शुरुआती यानी ग्रेड-1 फैटी लिवर में लाइफस्टाइल में बदलाव अहम भूमिका निभा सकता है. वजन को नियंत्रित करना और संतुलित डाइट अपनाना लिवर में जमा फैट कम करने में मदद कर सकता है.
डाइट में क्या शामिल करें?
फैटी लिवर होने पर जंक फूड और ज्यादा तली-भुनी चीजों को सीमित करें. डाइट में फल, हरी सब्जियां, दालें और प्रोटीन से भरपूर चीजों को जगह दें. ड्राई फ्रूट्स भी संतुलित मात्रा में लिए जा सकते हैं.
डाइट में क्या शामिल करें?
फैटी लिवर होने पर जंक फूड और ज्यादा तली-भुनी चीजों को सीमित करें. डाइट में फल, हरी सब्जियां, दालें और प्रोटीन से भरपूर चीजों को जगह दें. ड्राई फ्रूट्स भी संतुलित मात्रा में लिए जा सकते हैं.
एक्सरसाइज भी है जरूरी
सिर्फ डाइट बदलना काफी नहीं है. रोजाना शारीरिक गतिविधि करना भी जरूरी है.वॉकिंग, साइकिलिंग और स्विमिंग जैसी एक्टिविटी को अपनी दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है.
क्रैश डाइटिंग से बचें
वजन कम करने के लिए अचानक बहुत कम खाना या क्रैश डाइट अपनाना सही तरीका नहीं है.