हीट वेव को लेकर केंद्र पर क्यों भड़का सुप्रीम कोर्ट?
Princy Sharma
22 May 2025
हीटवेव से मौत
भारत में हीटवेव और उससे होने वाली मौतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है. यह कदम एक जनहित याचिका के जवाब में उठाया गया, जिसमें पिछले साल हीटवेव और गर्मी से संबंधित बीमारियों से 700 से अधिक मौतों का हवाला दिया गया.
केंद्र और राज्य सरकार
याचिका में केंद्र और राज्य सरकारों से हीटवेव प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय दिशानिर्देशों को सख्ती से लागू करने की मांग की गई है. इसके तहत पूर्वानुमान और निवारण के उपायों को तत्काल प्रभाव से लागू करने की अपील की गई है.
SC का नोटिस
मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने गृह मंत्रालय, पर्यावरण मंत्रालय, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और अन्य से दो हफ्ते में जवाब मांगा है.
मौतों पर चिंता
याचिका में यह बताया गया है कि पिछले साल भीषण गर्मी के कारण 700 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी. वकील आकाश वशिष्ठ ने कहा कि हीट स्ट्रेस अधिक तीव्र हो सकता है, जिससे भविष्य में मौतों का आंकड़ा और बढ़ सकता है.
गर्मी का बुरा असर
पहले, भीषण गर्मी और लू की स्थिति मुख्य रूप से उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में होती थी, लेकिन अब यह पूर्वी तट, उत्तर-पूर्व, दक्षिणी और अन्य हिस्सों में भी फैल चुकी है. IMD की रिपोर्ट ने इसकी पुष्टि की है.
नुकसान की भरपाई
याचिका में गर्मी से संबंधित बीमारियों के पीड़ितों को मुआवजा देने और अत्यधिक गर्मी के दौरान कमजोर वर्गों को न्यूनतम मजदूरी या अन्य सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की मांग की गई है.
आपदा प्रबंधन योजना
याचिका में यह भी कहा गया है कि 2019 में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जारी की गई कार्य योजना के बावजूद कई राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों ने अनिवार्य ग्रीष्म कार्य योजना को लागू नहीं किया है.
जलवायु परिवर्तन का असर
याचिका में बढ़ते तापमान को जलवायु परिवर्तन से जोड़ा गया है और इसके कारण होने वाली गर्मी लहरों का प्रबंधन करने के लिए सरकार से त्वरित कदम उठाने की अपील की गई है.
सरकार की जिम्मेदारी पर सवाल
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 35 के तहत केंद्र सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह हीटवेव जैसी आपदाओं से निपटने के लिए प्रभावी उपाय करें.