उज्ज्वल निकम से मीनाक्षी जैन तक, जानिए कौन हैं राज्यसभा के नए मनोनीत सदस्य


Reepu Kumari
13 Jul 2025

राष्ट्रपति मुर्मू का बड़ा फैसला

    भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्यसभा के लिए चार नए सदस्यों को मनोनीत किया है. यह नामांकन संविधान के अनुच्छेद 80(1)(क) के तहत किया गया है, जो राष्ट्रपति को 12 प्रतिष्ठित व्यक्तियों को उच्च सदन में नामित करने की अनुमति देता है.

उज्ज्वल निकम-आतंकवाद के खिलाफ बुलंद आवाज

    उज्ज्वल देवराव निकम देश के प्रमुख सरकारी वकील रहे हैं. उन्होंने मुंबई आतंकवादी हमलों सहित कई अहम मामलों में सरकार की ओर से पैरवी की. 2024 में बीजेपी ने उन्हें मुंबई उत्तर मध्य से लोकसभा उम्मीदवार भी बनाया था.

मीनाक्षी जैन-इतिहास को नया दृष्टिकोण देने वाली विदुषी

    डॉ. मीनाक्षी जैन दिल्ली विश्वविद्यालय के गार्गी कॉलेज में इतिहास की एसोसिएट प्रोफेसर रह चुकी हैं. वे एक जानी-मानी इतिहासकार हैं और भारतीय इतिहास को सांस्कृतिक नजरिए से प्रस्तुत करने के लिए पहचानी जाती हैं.

हर्षवर्धन श्रृंगला-विदेश नीति के अनुभवी चेहरे

    हर्षवर्धन श्रृंगला भारत के पूर्व विदेश सचिव हैं. वे अमेरिका, बांग्लादेश और थाईलैंड में राजदूत रह चुके हैं. 2023 में उन्होंने भारत की जी20 अध्यक्षता के लिए मुख्य समन्वयक की भूमिका निभाई थी.

सदानंदन मास्टर-राजनीति और साहस का प्रतीक

    सी. सदानंदन मास्टर केरल से हैं और समाजसेवा व शिक्षा से जुड़े रहे हैं. 1994 में राजनीतिक हिंसा में उनके दोनों पैर माकपा कार्यकर्ताओं द्वारा काट दिए गए थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और सक्रिय जीवन जारी रखा.

कैसे होता है राज्यसभा में नामांकन

    संविधान के अनुच्छेद 80 के तहत राष्ट्रपति कला, साहित्य, विज्ञान और सामाजिक सेवा के क्षेत्रों में प्रतिष्ठा प्राप्त 12 लोगों को राज्यसभा में मनोनीत कर सकते हैं. यह प्रावधान विशेषज्ञता को संसद में लाने का माध्यम है.

नामांकित सीटें और प्रक्रिया का उद्देश्य

    राज्यसभा की 12 सीटें नामित सदस्यों के लिए आरक्षित होती हैं. इनका उद्देश्य यह है कि संसद में ऐसे व्यक्ति भी प्रतिनिधित्व करें, जो जनप्रतिनिधि न होते हुए भी देश के निर्माण में बड़ी भूमिका निभा रहे हों.

नामांकन की विविधता ही विशेषता है

    इस बार नामांकित चारों सदस्य अलग-अलग क्षेत्रों से हैं – कानून, शिक्षा, कूटनीति और सामाजिक सेवा. यह विविधता राज्यसभा की बहसों को गहराई और संतुलन प्रदान करेगी.

आगे क्या होगा और क्या असर पड़ेगा

    इन नामांकनों के बाद अब ये चारों सदस्य संसद की कार्यवाही में भाग लेंगे और अपने अनुभवों से नीति निर्माण में योगदान देंगे. यह लोकतंत्र में विशेषज्ञता को जगह देने की दिशा में एक सशक्त कदम माना जा रहा है.

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