डॉ. मनमोहन सिंह के इन बयानों से जानें कैसे थे उनके विचार


Shanu Sharma
26 Sep 2025

नेतृत्व पर विचार

    मैं नहीं मानता कि मैं एक कमजोर पीएम रहा हूं. इतिहास मेरे प्रति समकालीन मीडिया या विपक्ष की तुलना में अधिक दयालु होगा. उन्होंने ये बात अपने कार्यकाल के अंत में कहा था.

धर्मनिरपेक्षता और एकता

    एकता और धर्मनिरपेक्षता सरकार का आदर्श वाक्य होगा. हम भारत में विभाजनकारी राजनीति बर्दाश्त नहीं कर सकते. सिंह ने हमेशा धर्मनिरपेक्षता को देश की नींव माना.

बहुसंस्कृतिवाद का सम्मान

    हमें सभ्यताओं के बीच संवाद और विविधता के प्रति सम्मान की आवश्यकता है. मनमोहन सिंह सहिष्णुता और विविध आस्थाओं का सम्मान करते थे.

भारत की उद्यमशीलता

    भारत ईश्वर द्वारा प्रदत्त अपार उद्यमशीलता कौशल वाला देश है. सिंह जनता को देश की सबसे बड़ी ताकत मानते थे.

आर्थिक विकास का दृष्टिकोण

    हमारी दृष्टि सिर्फ आर्थिक विकास की नहीं, बल्कि एक ऐसे विकास की है जो आम आदमी के जीवन को बेहतर बनाए. डॉ. सिंह ने हमेशा समावेशी विकास पर जोर दिया.

पूंजीवाद और नवाचार

    पूंजीवाद एक गतिशील शक्ति है, जिसके पीछे तकनीकी प्रगति, नवाचार और नए विचार हैं. उन्होंने पूंजीवाद को आर्थिक प्रगति का इंजन माना.

जीवन का दर्शन

    हारने वाला वह है, जिसने अपने सपनों को छोड़ दिया. जब तक आप कोशिश कर रहे हैं, आप हारे नहीं हैं. उनका विचार था कि मेहनत और लगन से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है.

प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी

    हर दिन प्रधानमंत्री भारत के लोगों का 24 घंटे का सेवक होता है.

पाकिस्तान पर सख्त रुख

    आज दुनिया में आतंकवाद का केंद्र पाकिस्तान है. विश्व समुदाय को इस सच्चाई से रूबरू होना होगा. मनमोहन सिंह का भारत की वैश्विक छवि मजबूत करने में बड़ा योगदान रहा है.

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