कितने भारतीयों ने नोबेल पुरस्कार जीतकर दुनिया में बजाया डंका?


Kuldeep Sharma
08 Oct 2025

रवींद्रनाथ टैगोर- साहित्य का पहला एशियाई सितारा (1913)

    टैगोर को 1913 में 'गीतांजलि' के लिए नोबेल मिला उन्होंने भारतीय दर्शन और आध्यात्मिकता को विश्व साहित्य में एक नई पहचान दी.

सी.वी. रमन- प्रकाश की तरंगों का रहस्य (1930)

    1930 में सर सी.वी. रमन ने दिखाया कि पारदर्शी पदार्थ से गुजरते हुए प्रकाश की तरंगें कैसे बदलती हैं. यह खोज आज भी फिजिक्स की बुनियाद है.

हर गोबिंद खुराना- जीवन के कोड के डिकोडर (1968)

    खुराना ने 1968 में नोबेल जीता जब उन्होंने दिखाया कि DNA की जानकारी कैसे प्रोटीन बनाने को नियंत्रित करती है.

मदर टेरेसा- मानवता की मूर्ति (1979)

    मदर टेरेसा को शांति के नोबेल से सम्मानित किया गया था. उन्होंने कोलकाता में 'मिशनरीज ऑफ चैरिटी' के जरिए अनगिनत जिदगियां संवारी.

सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर- तारों की सीमाओं के ज्ञाता (1983)

    चंद्रशेखर को तारों के जीवन और उनके पतन की वैज्ञानिक व्याख्या के लिए नोबेल मिला. उनकी खोज ने ब्लैक होल के सिद्धांत की नींव रखी.

अमर्त्य सेन- अर्थशास्त्र में मानवीय दृष्टिकोण (1998)

    अमर्त्य सेन ने 'कैपेबिलिटी एप्रोच' विकसित किया, जिससे विकास को मानव की स्वतंत्रता और अवसरों से मापा जा सकता है.

वेंकटरामन रामकृष्णन- राइबोसोम के रहस्य (2009)

    रमन के बाद रसायन विज्ञान में भारत की अगली बड़ी उपलब्धि. रामकृष्णन ने राइबोसोम की परमाणु संरचना का नक्शा तैयार किया, जिससे दवा विज्ञान में क्रांति आई.

कैलाश सत्यार्थी- बचपन के रक्षक (2014)

    कैलाश सत्यार्थी को बच्चों की शिक्षा और बाल मजदूरी के खिलाफ लड़ाई के लिए नोबेल शांति पुरस्कार मिला. उन्होंने हजारों बच्चों को नई जिंदगी दी.

अभिजीत बनर्जी- गरीबी पर प्रयोगशाला आधारित समाधान (2019)

    अभिजीत बनर्जी ने अपनी टीम के साथ गरीबी उन्मूलन के लिए फील्ड एक्सपेरिमेंट किए. उनका काम नीति निर्माण में दुनिया भर के लिए प्रेरणा बना.

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