रक्षा से लेकर वर्कर मोबिलिटी तक FTA डील से इन सेक्टर को फायदा
आज हो सकता है ऐतिहासिक एलान
भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) आज एक ऐतिहासिक और मेगा फ्री-ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की घोषणा कर सकते हैं. इसे दोनों पक्षों के रिश्तों में एक बड़े मोड़ के तौर पर देखा जा रहा है, जो वैश्विक स्तर पर बदलते व्यापार और राजनीति के समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है.
ट्रंप की नीतियों के बीच नया विकल्प
यह समझौता ऐसे समय सामने आ रहा है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों ने वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता बढ़ा दी है. भारत और EU इस डील के जरिए एक स्थिर, भरोसेमंद और दीर्घकालिक साझेदारी का संदेश देना चाहते हैं.
सिर्फ व्यापार नहीं, रणनीतिक साझेदारी
प्रस्तावित FTA केवल आयात-निर्यात तक सीमित नहीं रहेगा. व्यापार, रक्षा, सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, महत्वपूर्ण तकनीक और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था को मजबूत करना आज की बैठक के मुख्य एजेंडे में शामिल है.
रक्षा और सुरक्षा पर बड़ा कदम
शिखर सम्मेलन में एक नए रक्षा फ्रेमवर्क समझौते और रणनीतिक एजेंडा के अनावरण की भी संभावना है. यह साझेदारी भारत और EU के बीच रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई देने का काम करेगी.
यूरोप की बदलती रणनीति
यह नई पहल ऐसे समय में हो रही है जब यूरोप अमेरिका और चीन पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है. EU अन्य क्षेत्रों, खासकर भारत जैसे उभरते साझेदारों के साथ अपने आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों को गहरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.
मोदी करेंगे यूरोपीय नेतृत्व की मेजबानी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस अहम शिखर सम्मेलन में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा की मेजबानी करेंगे. दोनों नेता हाल ही में 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भारत आए थे.
दो अरब लोगों का विशाल बाजार
उर्सुला वॉन डेर लेयेन पहले ही संकेत दे चुकी हैं कि यह समझौता दो अरब लोगों का साझा बाजार बनाएगा, जो वैश्विक GDP के करीब एक-चौथाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करेगा. इसे उन्होंने “ऐतिहासिक व्यापार समझौता” बताया है.
रक्षा क्षेत्र में नई संभावनाएं
भारत और EU 2004 से रणनीतिक साझेदार हैं. प्रस्तावित सुरक्षा और रक्षा साझेदारी (SDP) रक्षा क्षेत्र में बेहतर तालमेल लाएगी और भारतीय कंपनियों के लिए EU के SAFE प्रोग्राम में भागीदारी के नए रास्ते खोलेगी.
श्रमिकों की आवाजाही पर भी सहमति संभव
यूरोप में भारतीय पेशेवरों और श्रमिकों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए एक समझौता ज्ञापन भी इस शिखर सम्मेलन का अहम परिणाम हो सकता है. फ्रांस, जर्मनी और इटली पहले ही भारत के साथ ऐसे समझौते कर चुके हैं.