क्या है इबोला वायरस? जानें लक्षण, बचाव और इलाज


Shanu Sharma
27 May 2026

खतरनाक वायरस पर चर्चा

    मध्य अफ्रीका से हाल ही में इबोला वायरस के फैलने की खबरें आने के बाद दुनिया भर में एक बार फिर इस खतरनाक वायरस पर चर्चा शुरू हो गई है.

घबराने की कोई जरूरत नहीं

    हालांकि, भारतीय उपमहाद्वीप में अभी तक कोई मामला सामने नहीं आया है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में अभी घबराने की कोई जरूरत नहीं है, लेकिन जागरूकता जरूर बरतनी चाहिए.

फिलोवायरस परिवार

    इबोला एक फिलोवायरस परिवार का सदस्य है. यह मुख्य रूप से अफ्रीका के कुछ हिस्सों में समय-समय पर फैलता रहा है. इसका सबसे बड़ा प्रकोप 2014-15 में पश्चिम अफ्रीका में देखा गया था, जिसमें 10,000 से ज्यादा लोग प्रभावित हुए थे.

इबोला और COVID-19 में अंतर

    डॉक्टर के मुताबिक इबोला, COVID-19 की तरह हवा से नहीं फैलता. यह केवल संक्रमित व्यक्ति के खून या शरीर के तरल पदार्थों के सीधे संपर्क से ही फैलता है.

किसको सबसे ज्यादा खतरा

    इबोला का खतरा सबसे ज्यादा उन लोगों के लिए होता है जो मरीज के सीधे संपर्क में आते हैं या फिर संक्रमित जंगली जानवरों या 'बुशमीट'के संपर्क में आते हैं.

क्या है लक्षण?

    संक्रमण के 2 से 21 दिनों के अंदर लक्षण नजर आने शुरू हो जाते है. शुरुआती लक्षण आम बीमारियों जैसे मलेरिया, टाइफाइड या फ्लू से मिलते-जुलते होते हैं.

इस पर ध्यान देने की जरूरत

    मरीज को सबसे पहले तेज बुखार, कमजोरी- थकान, शरीर में दर्द, उल्टी-दस्त और पेट दर्द की समस्या होती है.

इबोला की जांच

    इबोला की पुष्टि PCR टेस्ट और ELISA टेस्ट से की जाती है. हालांकि टेस्ट से पहले मरीज को आइसोलेट किया जाता है.

क्या है इलाज?

    इस वायरस के लिए दो मोनोक्लोनल एंटीबॉडी Inmazeb और Ebanga तैयार किए जा रहे हैं. हालांकि अभी केवल गंभीर मामलों के लिए मंजूरी मिल चुकी है. इसके अलावा वैक्सीन और नई एंटीवायरल दवाओं पर भी शोध की जा रही है.

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