क्या है बेबी ब्लू सिंड्रोम? बच्चों में दिखते हैं ये संकेत
खास तरीके की स्वास्थ्य समस्या
ब्लू बेबी सिंड्रोम एक खास तरीके की स्वास्थ्य समस्या है. जिसमें बच्चे की त्वचा, होंठ या नाखून नीले रंग के दिखाई देने लगते हैं.
ऑक्सीजन के प्रवाह प्रभावित
इसका मुख्य कारण शरीर में ऑक्सीजन की कमी होना है. कई मामलों में यह समस्या प्रदूषित पानी में मौजूद नाइट्रेट के कारण होती है, जो खून में ऑक्सीजन के प्रवाह को प्रभावित करता है.
लक्षणों की पहचान
डॉक्टर बताते हैं कि ब्लू बेबी सिंड्रोम को हल्के में नहीं लेना चाहिए. शुरुआती लक्षणों की पहचान और सही समय पर इलाज से बच्चे की जान बचाई जा सकती है.
डॉक्टर से संपर्क
इस बीमारी में बच्चे की त्वचा नीली पड़ने लगती है. इसके अलावा सांस लेने में परेशानी, जल्दी थक जाना, चिड़चिड़ापन और वजन का ठीक से न बढ़ना भी इसके आम लक्षण हैं. ऐसे संकेत दिखते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.
खतरे का संकेत
अगर बच्चा बारबार बेहोश हो रहा है, बहुत सुस्त रहता है या उसकी उंगलियों का आकार असामान्य हो रहा है, तो यह बीमारी गंभीर रूप ले चुकी हो सकती है. साथ ही शारीरिक और मानसिक विकास में रुकावट भी खतरे का संकेत है.
इतिहास और खानपान की आदतों
ब्लू बेबी सिंड्रोम की पहचान के लिए डॉक्टर बच्चे के शारीरिक लक्षण, पारिवारिक मेडिकल इतिहास और खानपान की आदतों की जांच करते हैं. त्वचा का रंग, दिल की धड़कन और फेफड़ों की आवाज पर विशेष ध्यान दिया जाता है.
हृदय और फेफड़ों की वास्तविक स्थिति
बीमारी की पुष्टि के लिए ब्लड टेस्ट, छाती का एक्सरे, ECG, इकोकार्डियोग्राम और कार्डिएक कैथीटेराइजेशन जैसी जांच की जाती हैं. इनसे हृदय और फेफड़ों की वास्तविक स्थिति सामने आती है.
ऑक्सीजन थेरेपी और एस्कॉर्बिक एसिड
इलाज में मेथिलीन ब्लू दवा दी जाती है, जो खून में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाने में मदद करती है. गंभीर मामलों में ऑक्सीजन थेरेपी और एस्कॉर्बिक एसिड भी दिया जाता है
जन्मजात हृदय दोष
गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान, शराब और अवैध दवाओं से दूरी बनाए रखना बेहद जरूरी है. इससे जन्मजात हृदय दोष और ब्लू बेबी सिंड्रोम का खतरा कम किया जा सकता है.