इमोशनल ईटिंग खतरनाक? जानें लक्षण
क्या होती है इमोशनल ईटिंग
इमोशनल ईटिंग तब होती है जब इंसान पेट की भूख नहीं बल्कि मन की बेचैनी के कारण खाना खाता है.
भागदौड़ भरी जिंदगी बन रही वजह
काम का दबाव, समय की कमी और जिम्मेदारियां मानसिक थकान बढ़ा रही हैं, जिससे यह आदत पनप रही है.
युवाओं में ज्यादा दिख रही समस्या
आज की युवा पीढ़ी में तनाव, अकेलापन और अनिश्चित भविष्य इमोशनल ईटिंग को बढ़ावा दे रहा है.
किस तरह का खाना ज्यादा खाया जाता है
इस दौरान लोग जंक फूड, मिठाई और तला-भुना खाना ज्यादा पसंद करते हैं क्योंकि इससे तुरंत सुकून मिलता है.
बिना भूख के खाने की आदत
इमोशनल ईटिंग में पेट भरा होने के बावजूद बार-बार खाने का मन करता है.
तनाव और उदासी बनती है ट्रिगर
ऑफिस स्ट्रेस, रिश्तों की परेशानी, नींद की कमी और बोरियत इसके मुख्य कारण माने जाते हैं.
वजन बढ़ने का खतरा
लंबे समय तक इमोशनल ईटिंग करने से वजन तेजी से बढ़ सकता है.
शरीर पर पड़ता है असर
इससे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और पाचन संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है.
मानसिक सेहत भी होती है प्रभावित
लगातार इमोशनल ईटिंग करने से अपराधबोध, तनाव और चिंता और गहरी हो सकती है.
Disclaimer:
यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. theindiadaily.com इन मान्यताओं और जानकारियों की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह ले लें.