1 लीटर पेट्रोल पर सरकार का कितना मुनाफा? बेस प्राइज में कितना अंतर
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी
दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, भारत में भी इसका असर दिखा. 20 मार्च से तेल कंपनियों ने प्रीमियम पेट्रोल की कीमत ₹2 से ₹2.35 प्रति लीटर तक बढ़ा दी.
सरकार के खजाने में कितनी कमाई
रेगुलर पेट्रोल की कीमत वही पुरानी बनी हुई है. दिल्ली में अब भी ₹94.77 प्रति लीटर मिल रहा है. लेकिन सवाल यह है कि आप 1 लीटर पेट्रोल के लिए जो पैसे देते हैं, उसमें से कितना सरकार को जाता है और कंपनियां कितना कमाती हैं?
हर लीटर पर अच्छी कमाई
भारत में पेट्रोल की कुल कीमत का बड़ा हिस्सा टैक्स से बनता है. केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर हर लीटर पर अच्छी कमाई करती हैं.
आधी से ज्यादा रकम
दिल्ली में ₹94.77 की कीमत में से लगभग ₹35 से ₹45 टैक्स के रूप में जाता है. यानी आधी से ज्यादा रकम सरकारी खजाने में चली जाती है.
फिक्स्ड एक्साइज ड्यूटी
केंद्र सरकार हर लीटर पेट्रोल पर फिक्स्ड एक्साइज ड्यूटी लेती है. यह राशि करीब ₹19.90 प्रति लीटर है, यह सबसे बड़ा टैक्स घटक है. इसमें कोई बदलाव नहीं होता. कच्चे तेल की कीमत चाहे जितनी भी ऊपर-नीचे हो, यह तय रहता है.
राज्य सरकार का VAT
राज्य सरकारें VAT के जरिए अपना टैक्स जोड़ती हैं. यह हर राज्य में अलग होता है. दिल्ली में VAT लगभग ₹15.39 प्रति लीटर है. मुंबई, हैदराबाद जैसे शहरों में यह ज्यादा होता है. इसलिए वहां पेट्रोल महंगा पड़ता है.
बेस प्राइस
ऑयल मार्केटिंग कंपनियां रिफाइनिंग, ट्रांसपोर्ट और अन्य खर्चों के बाद बेस प्राइस तय करती हैं. यह आमतौर पर 52 से 56 रुपये प्रति लीटर के बीच रहती है.
कंपनियों का मुनाफा
कंपनियों का मुनाफा कच्चे तेल की वैश्विक कीमत पर निर्भर करता है. अभी उनका मार्जिन 10 से 15 रूपये प्रति लीटर के आसपास अनुमानित है.
पेट्रोल पंप मालिक
पेट्रोल पंप मालिकों को भी हिस्सा मिलता है. वे हर लीटर पर ₹3.14 से ₹4.43 तक कमीशन पाते हैं. यह उनकी दुकान चलाने, स्टाफ और अन्य खर्चों के लिए तय कमाई है.