उत्तराखंड के पहाड़ों में क्यों होती है मसाण देवता की पूजा? ये है वजह


Antima Pal
17 Feb 2025

गांव की रक्षा करते है मसाण देवता

    मान्यता है कि मसाण देवता गांव की रक्षा करते है.

गांव वालों को कोई नुकसान नहीं होने देते

    माना जाता है कि जंगली जानवरों से भी गांव वालों को कोई नुकसान नहीं होने देते.

मसाण देवता के मंदिर ऐसी जगह जहां चिताएं जलती हैं

    उत्तराखंड के पहाड़ों पर ज्यादातर मसाण देवता के मंदिर ऐसी जगह होते हैं, जहां पर चिताएं जलती हैं.

बुरी आत्मा या पिशाच पीड़ित को लग गया

    यहां मसाण लगने का मतलब होता है कि कोई बुरी आत्मा या पिशाच पीड़ित को लग गया है.

मसाण देवता की जाती है पूजा

    जिसके बाद मसाण देवता की पूजा की जाती है.

पीड़ित व्यक्ति हो जाता है ठीक

    अक्सर देखा जाता है कि मसाण देवता की पूजा के बाद पीड़ित व्यक्ति एकदम ठीक हो जाता है.

स्थानीय भाषा में कहा जाता है छल लगना

    मसाण लगने को यहां की स्थानीय भाषा में छल लगना या परी लगना कहा जाता है.

देवताओं के प्रति लोगों की है काफी आस्था

    यहां के लोग देवताओं के प्रति आस्था और उनके बनाए नियमों के अनुसार ही चलते हैं.

कण-कण में देवी-देवताओं का वास

    उत्तराखंड के कण-कण में देवी-देवताओं का वास माना जाता है.

भूतों से रक्षा के लिए बनाए गए मंदिर

    यहां कई जगहों पर भूतों से रक्षा के लिए उनके मंदिर भी बनाए गए हैं, जिन्हें पहाड़ों में मसाण बोला जाता है.

More Stories