उत्तराखंड का चमत्कारी मंदिर है 'हाट कालिका' जहां शाम को सोने आती है मां काली
देवभूमि का अद्भुत मंदिर
उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है, जहां कई धार्मिक स्थल हैं. पिथौरागढ़ के गंगोलीहाट स्थित हाट कालिका मंदिर महाकाली के विश्राम स्थल के रूप में प्रसिद्ध है.
महाकाली की दिव्य उपस्थिति
मान्यता है कि मां काली स्वयं यहां विराजती हैं. स्कंदपुराण के मानस खंड में इस मंदिर का वर्णन मिलता है.
रहस्यमयी डोला यात्रा
किवदंती के अनुसार, रात में महाकाली का डोला चलता है, जिसमें उनके गण और दिव्य सेना साथ होती हैं. इसे छूने पर भक्तों को विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है.
मां काली का विश्राम स्थल
शक्तिपीठ के पास महाकाली का बिस्तर लगाया जाता है. सुबह इसमें सिलवटें दिखाई देती हैं, जिससे संकेत मिलता है कि यहां मां ने विश्राम किया है.
कुमाऊं रेजिमेंट की आराध्य देवी
भारतीय सेना की कुमाऊं रेजिमेंट के जवान किसी भी युद्ध या मिशन से पहले हाट कालिका मंदिर में माथा टेकते हैं.
युद्ध के बाद महाकाली की मूर्ति स्थापना
1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद कुमाऊं रेजिमेंट ने महाकाली की प्रतिमा स्थापित की. 1994 में बड़ी प्रतिमा चढ़ाई गई, जो सेना द्वारा स्थापित पहली मूर्ति थी.
विशेष पूजन और अनुष्ठान
यहां सहस्त्र चंडी यज्ञ, सहस्रघट पूजा और अष्टबलि अठवार का पूजन किया जाता है. श्रद्धालु महाकाली के चरणों में फूल अर्पित कर रोग, शोक और दरिद्रता से मुक्ति पाते हैं.