पितृपक्ष की नवमी क्यों है खास? जानें किन बातों का रखें ध्यान
Princy Sharma
12 Sep 2025
मातृ नवमी
मातृ नवमी के दिन इस दिन विशेष रूप से मातृ पक्ष के श्राद्ध कर्म किए जाते हैं. यह दिन उन महिलाओं का श्राद्ध करने के लिए होता है जिनकी मृत्यु पति के जीवित रहते ही हो गई थी.
श्राद्ध का समय
इस दिन का विशेष महत्व इसलिए है क्योंकि यह दिन माताओं, बहनों, और बेटियों के श्राद्ध के लिए समर्पित होता है, जिनकी मृत्यु तिथि का पता नहीं होता. इस दिन श्राद्ध करना बहुत शुभ माना जाता है.
मातृ पितृ प्रसन्न होते हैं
मातृ नवमी के दिन किए गए श्राद्ध से पितृ और मातृ दोनों प्रसन्न होते हैं और आपके वंश का विकास होता है. यह दिन उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करने का सर्वोत्तम अवसर है.
मोक्ष और शांति का वरदान
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन किए गए श्राद्ध से दिवंगत मातृ पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है.
मातृत्व और स्नेह की प्राप्ति
मातृ नवमी का श्राद्ध करने वाले व्यक्ति के जीवन में कभी भी मातृत्व और स्नेह की कमी नहीं होती. यह दिन परिवार में सुकून और प्रेम का संचार करता है.
क्या करें मातृ नवमी के दिन?
इस दिन आपको दिवंगत मातृ पितरों के श्राद्ध के साथ-साथ दान-पुण्य भी करना चाहिए. यह दान आपके जीवन में सुख-शांति और समृद्धि लाने वाला होता है.
सुहागिन महिलाओं को उपहार
मातृ नवमी के दिन सुहागिन महिलाओं को सुहाग का सामान देना शुभ माना जाता है. यह एक प्रकार से उनकी लंबी उम्र और खुशहाली के लिए आशीर्वाद है.
ब्राह्मणों और वृद्ध महिला
मातृ नवमी के दिन ब्राह्मण पत्नी को भोजन कराना और वृद्ध महिलाओं को उपहार देना भी पुण्यकारी माना जाता है. इससे आपके घर में सुख-शांति बनी रहती है.
पशु-पक्षियों को दान
इस दिन पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना चाहिए. इसके साथ ही गाय, कुत्ते, चींटी, मछली और कौवे को अन्न-जल दें.
डिस्क्लेमर
यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. theindiadaily.com इन मान्यताओं और जानकारियों की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह ले लें.