यूं ही नहीं लगाते माथे पर तिलक, जानें इसके पीछे की साइंस
हिन्दू संस्कृति का अभिन्न अंग
कोई धार्मिक आयोजन बिना तिलक के पूर्ण नहीं माना जाता है, क्योंकि ये हिन्दू संस्कृति का एक अभिन्न अंग है.
मस्तक पर सुशोभित तिलक
देवी-देवताओं, योगियों और संत-महात्माओं के मस्तक पर तो हमेशा तिलक सुशोभित रहता है.
तिलक लगाने का प्रचलन
आम लोगों में त्योहार, पूजा-पाठ और संस्कारों जैसे शुभ अवसरों पर ही तिलक लगाने का प्रचलन है.
शांत होते हैं ग्रह
माना जाता है कि माथे पर तिलक लगाने से सकारात्म ऊर्चा का प्रवाह होता है और कुंडली में मौजूद उग्र ग्रह शांत होते हैं.
बढ़ता है सौभाग्य
शास्त्रों के मुताबिक चंदन का तिलक लगाने वाले का घर अन्न-धन से भरा रहता है और सौभाग्य में बढ़ोतरी होती है.
बढ़ता है यश
तिलक लगाने से जीवन में यश बढ़ता है और पाप का नाश होता है.
आते हैं अच्छे विचार
माथे पर तिलक लगाने से मन में अच्छे विचार आते हैं और किसी भी काम को करने की क्षमता बढ़ जाती है.
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
हमारी दोनों भोहों के बीच सुषुम्ना, इड़ा और पिंगला नाड़ियों के ज्ञानतंतुओं का केंद्र मस्तिष्क ही है, जो दिव्य नेत्र या तृतीय नेत्र के समान माना जाता है.
ओज और तेज बढ़ता है
माथे पर तिलक लगाने से आज्ञाचक्र जागृत होकर व्यक्ति की शक्ति को उर्ध्वगामी बनाता है, जिससे उसका ओज और तेज बढ़ता है.
होता है ये अनुभव
ललाट पर नियमित रूप से तिलक लगते रहने से शीतलता, तरावट और शांति का अनुभव होता है.
पीड़ा से मुक्ति
सिर दर्द की पीड़ा नहीं सताती और मेधाशक्ति तेज होती है.
बना रहता है आत्मविश्वास
तिलक लगाने से विवेकशीलता और आत्मविश्वास बना रहता है.