काशी का चमत्कारी शिवलिंग, जिसका हर दिन बढ़ता है आकार


Kanhaiya Kumar Jha
15 Jan 2026

काशी के श्री तिलभांडेश्वर महादेव मंदिर की अद्भुत महिमा

    वाराणसी के भेलूपुरा स्थित श्री तिलभांडेश्वर महादेव की महिमा अद्वितीय मानी जाती है. यहां मकर संक्रांति पर आस्था का सैलाब उमड़ता है और दूर-दूर से लोग यहां पहुंचते हैं.

स्वयंभू शिवलिंग का अति प्राचीन इतिहास

    यह स्वयंभू शिवलिंग, जो लगभग 2500 साल पुराना माना जाता है, भक्तों के कष्ट दूर करने और ग्रह दोषों (जैसे काल सर्प दोष) के निवारण के लिए प्रसिद्ध है, और शिव पुराण में भी इसका उल्लेख है.

विश्व का इकलौता ऐसा शिवलिंग

    यह विश्व का एकमात्र ऐसा स्वयंभू शिवलिंग है, जहां भगवान शिव के साथ सूर्य और चंद्र भी एक ही पिंड में विराजमान हैं. तीनों शक्तियों का संगम इसे विशेष बनाता है.

हर दिन बढ़ता है शिवलिंग

    मान्यता है कि सतयुग से लेकर आज तक यह शिवलिंग रोज एक तिल के आकार के बराबर बढ़ता है. इस रहस्य के आगे वैज्ञानिक भी नतमस्तक हैं.

अनोखी रस्म, नारियल की छाल

    शिवलिंग की वृद्धि को संतुलित रखने के लिए पुजारी दिन में तीन बार नारियल की छाल से बाबा को साफ करते हैं. मान्यता है कि ऐसा न करने पर आकार तेजी से बढ़ेगा.

मकर संक्रांति और खिचड़ी भोग

    मकर संक्रांति पर बाबा को खिचड़ी का विशेष भोग लगाया जाता है. इसी खिचड़ी को प्रसाद के रूप में बांटा जाता है. मान्यता है कि इसे ग्रहण करने से साल भर स्वास्थ्य बना रहता है. इनपुट-नित्यानंद मिश्रा

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