छठ पूजा 2025, आस्था, तप और सूर्य उपासना का चार दिवसीय पर्व


Reepu Kumari
21 Oct 2025

महापर्व छठ पूजा-आस्था और सूर्य उपासना का पर्व

    छठ पूजा सूर्य देव और उनकी शक्ति स्वरूपा छठी मैया की आराधना का पर्व है. इस त्योहार में व्रती चार दिनों तक कठोर नियमों का पालन करते हुए उपवास रखता है और जल में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करता है. यह पर्व आत्मशुद्धि और आस्था की पराकाष्ठा का प्रतीक है.

छठ पूजा की तिथि और अवधि

    हिंदू पंचांग के अनुसार, छठ पूजा कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से सप्तमी तिथि तक चलती है. इस साल छठ पूजा की शुरुआत 25 अक्टूबर 2025 (शनिवार) से होगी और 28 अक्टूबर 2025 (मंगलवार) को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर इसका समापन किया जाएगा.

पहला दिन: नहाय-खाय (25 अक्टूबर 2025)

    छठ पूजा का पहला दिन नहाय-खाय कहलाता है. इस दिन व्रती पवित्र जल से स्नान कर सात्विक भोजन करते हैं. यह दिन शरीर और मन की शुद्धि का प्रतीक है. इस भोजन में आमतौर पर चना दाल, कद्दू और अरवा चावल शामिल होते हैं.

दूसरा दिन: खरना (26 अक्टूबर 2025)

    दूसरे दिन खरना का पर्व मनाया जाता है. इस दिन व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखता है और शाम को मिट्टी के चूल्हे पर गुड़-चावल की खीर बनाकर छठी मैया को भोग लगाता है. इसके बाद व्रती और परिवारजन प्रसाद ग्रहण करते हैं, जिससे उपवास का मुख्य चरण शुरू होता है.

तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य (27 अक्टूबर 2025)

    छठ पूजा का तीसरा दिन सबसे भावनात्मक होता है. इस दिन व्रती नदी या तालाब के किनारे डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करता है. परिवारजन छठी माई के गीत गाते हैं और व्रती के चारों ओर श्रद्धा का वातावरण बनता है.

चौथा दिन: उगते सूर्य को अर्घ्य और पारण (28 अक्टूबर 2025)

    अंतिम दिन सुबह व्रती उगते सूर्य को अर्घ्य देता है और व्रत का पारण करता है. इस क्षण को सबसे पवित्र माना जाता है, क्योंकि यह सूर्य देव की जीवनदायिनी शक्ति का प्रतीक है. पारण के बाद परिवारजन प्रसाद ग्रहण करते हैं और एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं.

छठी मैया कौन हैं?

    सनातन परंपरा के अनुसार, छठी मैया यानी षष्ठी देवी, भगवान सूर्य की ऊर्जा का प्रतीक हैं. उन्हें संतान की रक्षक और दीर्घायु प्रदान करने वाली देवी माना जाता है. लोककथाओं में कहा गया है कि छठी मैया की पूजा करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और संतान हर प्रकार की बाधा से सुरक्षित रहती है.

छठ पूजा का पौराणिक महत्व

    कहा जाता है कि छठ पूजा का आरंभ त्रेतायुग में माता सीता द्वारा किया गया था, जब उन्होंने श्रीराम के साथ अयोध्या लौटने के बाद सूर्य देव की उपासना की थी. यह परंपरा आज तक चली आ रही है और इसे सूर्य के प्रति आभार के रूप में मनाया जाता है.

संध्या अर्घ्य का विशेष महत्व

    किसी भी देवता की उपासना में पहले उनकी शक्ति की पूजा की जाती है. इसी कारण संध्या अर्घ्य के दौरान पहले छठी मैया की पूजा होती है. यह क्षण केवल सूर्यास्त का नहीं, बल्कि आत्मसमर्पण और कृतज्ञता का प्रतीक है, जब व्रती अपनी आस्था को जल में समर्पित करता है.

Disclaimer

    यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. theindiadaily.com इन मान्यताओं और जानकारियों की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह ले लें.

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