आमलकी एकादशी के दिन क्यों की जाती है आंवले की पूजा?
Princy Sharma
04 Mar 2025
एकादशी
हिंदू धर्म में एकादशी का बहुत बड़ा महत्व है. हर महीने दो एकादशी आती हैं. एक शुक्ल पक्ष में और दूसरी कृष्ण पक्ष में.
आमलकी एकादशी
फाल्गुन माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी को सबसे खास और लाभदायक माना जाता है जिसे आंवला एकादशी या आमलकी एकादशी या रंगभरी एकादशी के नाम से जाना जाता है.
कब है आमलकी एकादशी?
इस साल आंवला एकादशी या आमलकी एकादशी का व्रत 10 मार्च को रखा जाएगा. इस दिन भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की आराधना की जाती है.
व्रत का महत्व
आंवला एकादशी के दिन आंवले के पेड़ की पूजा भी पूरे विधि-विधान से की जाती है. ऐसा माना जाता है कि व्रत करने से जीवन की सभी मुश्किलें दूर होती है और मोक्ष भी प्राप्त होता है.
आशीर्वाद होता है प्राप्त
शास्त्रों के मुताबिक, आंवला एकादशी का व्रत रखने से 1000 गाय को दान करने बराबर पुण्य मिलता है. इसके साथ धन, सौभाग्य, आरोग्य और समृद्धि का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है.
आंवले में गुण
ऐसा माना जाता है कि आमलकी एकादशी के दिन आंवले में भगवान विष्णु और भगवान शिव के दोनों गुण होते हैं.
मां लक्ष्मी ने किया विचार
पौराणिक कथा के मुताबिक, एक बार धरती लोक पर मां लक्ष्मी भगवान शिव और भगवान विष्णु की एक साथ पूजा करने का विचार किया था.
लक्ष्मी मां को आया ध्यान
भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र और भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का इस्तेमाल किया जाता है. फिर लक्ष्मी मां को ध्यान आया कि आंवले के पेड़ में तुलसी और बेल दोनों के गुण होते है.
आंवले के पेड़ की पूजा
इसके बाद माता लक्ष्मी ने आंवले के पेड़ को भगवान विष्णु और भगवान शिव का स्वरूप मानकर उसकी पूजा की. तब से यह प्रथा चली आ रही है.
डिस्क्लेमर
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