16 साल के बेटे ने अपनी कंपनी में पिता को किया हायर....हर महीने देता है धांसु सैलरी
केरल के 16 वर्षीय राउल जॉन अजू ने नौ साल की उम्र में AI सीखी, 12 साल की उम्र में रोबोट बनाया और अब कंपनी चलाते हुए पिता को हर महीने 2 लाख वेतन देते हैं.
केरल के 16 वर्षीय राउल जॉन अजू की कहानी किसी अनुभवी टेक उद्यमी की कहानी जैसी लगती है. नौ साल की उम्र में उन्होंने खुद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सीखना शुरू किया. उनके पिता अजू जोसेफ उस समय Adobe में काम करते थे, जिससे राउल को आधुनिक और प्रीमियम टेक्नोलॉजी टूल्स तक पहुंच मिली. राउल ने केवल इनका इस्तेमाल नहीं किया, बल्कि यह समझने की कोशिश की कि तकनीक कैसे काम करती है और उससे क्या बनाया जा सकता है.
12 साल में बनाया रोबोट
तीन साल बाद उनकी जिज्ञासा ने ठोस रूप लिया. 12 साल की उम्र में उन्होंने स्कूल साइंस प्रोजेक्ट के लिए MeBot नाम का रोबोट बनाया. इसके बाद उन्होंने MeBot, RESQ AI, ZapGap, Investo AI और FeedFye समेत 15 से ज्यादा AI टूल विकसित किए. उनकी तकनीकी सोच का केंद्र वास्तविक समस्याओं के समाधान में AI का इस्तेमाल करना रहा है.
पिता बने कर्मचारी
राउल की कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि 16 साल की उम्र में वह अपनी कंपनी चलाने के साथ पिता को भी नौकरी दे रहे हैं. अजू जोसेफ Amazon, Adobe, Wipro और IBM जैसी कंपनियों में काम कर चुके हैं. राउल उन्हें करीब 2 लाख महीने का वेतन देते हैं. उनका कहना है कि पिता के साथ काम करने से उन्हें संगठन और टेक्नोलॉजी बिजनेस की व्यावहारिक समझ मिलती है. वह मजाक में कहते हैं कि पिता का कंपनी में होना उनके मार्केटिंग के लिए भी अच्छा है.
AI शिक्षा पर जोर
राउल की पहल अब सिर्फ AI टूल बनाने तक सीमित नहीं है. अपने स्टार्टअप और ThinkCraft Academy के जरिए वह AI की शिक्षा भी दे रहे हैं. उनकी ट्रेनिंग पहलों से दुनिया भर में करीब पांच लाख शिक्षार्थियों के जुड़ने की रिपोर्ट है, जिनमें IIT, IIM, विदेशी विश्वविद्यालयों और कॉरपोरेट संस्थानों से जुड़े लोग शामिल हैं. सोशल मीडिया पर वह “Raul the Rockstar” नाम से भी AI संबंधी जानकारी साझा करते हैं.
UN तक पहुंची पहचान
2026 India AI Impact Summit में राउल ने AI और बच्चों की सुरक्षा पर संयुक्त राष्ट्र के सत्र में हिस्सा लिया और उद्घाटन संबोधन दिया. उन्होंने UN Special Envoy Amandeep Gill से मुलाकात की और UN Secretary-General António Guterres से भी बातचीत की. 2025 के India Today South Conclave में उन्होंने भारत को टेक्नोलॉजी लीडर बनाने के लिए रिसर्च, स्किल, शिक्षा और रचनात्मकता को जरूरी बताया.
सबसे बड़ी सीख
राउल का सफर सिर्फ AI उपलब्धियों की कहानी नहीं है. नौ साल में सीखना, 12 में बनाना और 16 में कंपनी खड़ी करना उनकी असाधारण क्षमता दिखाता है. लेकिन उनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि वह मानते हैं कि सफलता का मतलब सबकुछ जान लेना नहीं, बल्कि यह समझना है कि अभी क्या सीखना बाकी है.