मिडिल ईस्ट तनाव के बीच जासूसी का खेल, न्यूक्लियर वैज्ञानिकों की हत्या; क्या होगा ईरान का नेक्स्ट स्टेप
ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच खुफिया अभियानों और जवाबी कार्रवाई को लेकर चर्चा तेज है. न्यूक्लियर वैज्ञानिकों की हत्या के बाद ईरान की संभावित प्रतिक्रिया और इजरायल में कथित घुसपैठ ने इस संघर्ष को और जटिल बना दिया है.
ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी तनाव अब केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं रह गया है. खुफिया अभियानों, जासूसी और लक्षित हत्याओं को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच टकराव बढ़ने की चर्चा है. इजराइली इंटेलिजेंस से जुड़े अभियानों में ईरान के न्यूक्लियर कार्यक्रम से जुड़े वैज्ञानिकों को निशाना बनाए जाने के बाद तेहरान की ओर से जवाबी कार्रवाई की तैयारी की गई. न्यूक्लियर कार्यक्रम से जुड़े वैज्ञानिकों को निशाना बनाए जाने को ईरान के लिए रणनीतिक चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है.
चर्चा के मुताबिक, ईरान से जुड़े एजेंटों ने इजरायल में घुसकर उसके न्यूक्लियर कार्यक्रम से संबंधित महत्वपूर्ण लोगों और ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की. अगर ऐसे अभियानों की पुष्टि होती है तो यह संघर्ष के एक अलग और बेहद संवेदनशील मोर्चे को सामने लाता है. इसमें आम सैन्य कार्रवाई के बजाय खुफिया नेटवर्क, गुप्त अभियान और लक्षित ऑपरेशन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू जैसे शीर्ष नेताओं के सामने खतरे भी बढ़ गए हैं. ईरान और उसके विरोधियों के बीच बढ़ते टकराव के बीच इन नेताओं की सुरक्षा भी एक अहम मुद्दा बन गई है. इस पूरे मुद्दे को समझने के लिए आप इंडिया डेली के इस खास वीडियो को देख सकते हैं.