अब तक TDS से जुड़े कुछ खास लेन-देन के लिए करदाताओं को अलग-अलग फॉर्म भरने पड़ते थे. कभी मकान की खरीद, कभी किराया, तो कभी किसी और भुगतान के लिए नया फॉर्म खोजना आम झंझट थी. आयकर विभाग ने इस उलझन को खत्म करने के लिए एक ही नया फॉर्म शुरू किया है. विभाग का कहना है कि इसका मकसद पूरी प्रक्रिया को आसान बनाना है, ताकि करदाताओं को अलग-अलग फॉर्म के चक्कर में न पड़ना पड़े.
यह बदलाव नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 के तहत हुआ है. फॉर्म 141 ने फॉर्म 26QB, 26QC, 26QD और 26QE की जगह ले ली है. इसके जरिए व्यक्ति और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) TDS की जानकारी दे सकेंगे और टैक्स जमा करने की प्रक्रिया भी पूरी कर सकेंगे.
फॉर्म 141 TDS भरने के लिए इस्तेमाल होने वाला एकीकृत फॉर्म है. पहले जहां चार अलग फॉर्म भरे जाते थे, वहीं अब एक ही फॉर्म से काम चल जाएगा. इसका उपयोग मकान या जमीन खरीदने, किराए का भुगतान करने, ठेकेदारों और प्रोफेशनल्स को पैसे देने तथा क्रिप्टोकरेंसी जैसी डिजिटल संपत्तियों के ट्रांसफर में किया जा सकता है. यानी जिन कामों के लिए पहले चार फॉर्म अलग-अलग भरे जाते थे, वे अब एक ही जगह सिमट गए हैं.
खास बात यह है कि 1 अक्टूबर 2026 से भारत में रहने वाला व्यक्ति या HUF किसी अनिवासी विक्रेता से संपत्ति खरीदने पर शेड्यूल E के जरिए TDS की जानकारी दे सकता है. ऐसी स्थिति में इस प्रक्रिया के लिए TAN लेना जरूरी नहीं होगा. इससे ऐसे खरीदारों को अलग से TAN बनवाने की औपचारिकता से छुटकारा मिल जाएगा.
करदाता आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर PAN से लॉगिन करें. इसके बाद फॉर्म 141 और लागू शेड्यूल चुनें. भुगतान करने और पाने वाले की जानकारी भरें, फिर लेन-देन, TDS राशि और टैक्स जमा करने का ब्योरा दर्ज करें. सभी विवरण जांचकर फॉर्म जमा कर दें. पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होने से करदाता घर बैठे अपना काम निपटा सकते हैं.
विभाग के निर्देशों के अनुसार TDS जिस महीने में काटा गया हो, उसके आखिर से एक महीने के भीतर चालान-कम-स्टेटमेंट जमा करना होता है. टैक्स की राशि भी तय समयसीमा के अंदर जमा करना जरूरी है. इसलिए फॉर्म भरते समय तारीखों का ध्यान रखना जरूरी है.