कम सैलरी में भी हर महीने बचत मुमकिन, रोज की 8 छोटी आदतें बदल देंगी आपकी आर्थिक तस्वीर
कम सैलरी होने के बावजूद हर महीने बचत करना नामुमकिन नहीं है, बस जरूरत है सही प्लानिंग और रोज़ की कुछ समझदारी भरी आदतों की. अक्सर लोग सोचते हैं कि बचत सिर्फ ज्यादा कमाने वालों के लिए होती है.
नई दिल्ली: महंगाई के इस दौर में कम सैलरी वालों के लिए सबसे बड़ी चुनौती हर महीने बचत करना है. सैलरी आते ही किराया, बिल और रोजमर्रा के खर्च जेब खाली कर देते हैं. ऐसे में लोग अक्सर बचत को अगली सैलरी तक टाल देते हैं. लेकिन फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स मानते हैं कि बचत का सीधा संबंध कमाई से नहीं, बल्कि आदतों से होता है.
अगर रोजमर्रा की छोटी गलतियों को सुधारा जाए और खर्चों पर नजर रखी जाए, तो कम सैलरी में भी हर महीने कुछ न कुछ पैसा जोड़ा जा सकता है. इसके लिए किसी बड़े निवेश या सख्त नियमों की जरूरत नहीं होती. बस रोज़ के कुछ छोटे कदम लंबे समय में बड़ी बचत की नींव रख देते हैं.
रोजाना खर्च लिखने की आदत बनाएं
अक्सर लोगों को पता ही नहीं चलता कि उनका पैसा कहां खर्च हो रहा है. रोज के खर्च लिखने से गैर-जरूरी खर्च सामने आते हैं. चाय, ऑनलाइन डिलीवरी या छोटे सब्सक्रिप्शन मिलकर महीने के अंत में बड़ा बोझ बन जाते हैं. खर्च लिखने से खुद-ब-खुद नियंत्रण आने लगता है.
हर दिन थोड़ा पैसा अलग रखें
बचत महीने के अंत में नहीं, शुरुआत में करनी चाहिए. रोजाना 50 या 100 रुपये अलग रखने से महीने के अंत तक अच्छी रकम जमा हो जाती है. यह रकम अलग खाते या गुल्लक में रखें ताकि खर्च करने का मन न करे.
बाहर खाने और ऑनलाइन ऑर्डर पर लगाम
कम सैलरी वालों के बजट को सबसे ज्यादा नुकसान बाहर का खाना करता है. घर का बना खाना न सिर्फ सस्ता बल्कि सेहतमंद भी होता है. हफ्ते में एक-दो दिन ही बाहर खाने की आदत डालने से बड़ी बचत संभव है.
बिना प्लान खरीदारी से बचें
सेल और डिस्काउंट के नाम पर की गई खरीदारी अक्सर गैर-जरूरी होती है. हर खरीद से पहले खुद से पूछें कि क्या इसकी सच में जरूरत है. यह आदत धीरे-धीरे बचत को मजबूत बनाती है.
डिजिटल पेमेंट में सतर्कता रखें
डिजिटल पेमेंट आसान जरूर है, लेकिन इससे खर्च का अहसास कम हो जाता है. छोटे-छोटे ट्रांजैक्शन जोड़कर बड़ा खर्च बन जाते हैं. रोज का लिमिट तय करना मददगार साबित हो सकता है.