Deepfake: एक नजर में पहचान लेंगे असली-नकली फोटो... बस ध्यान रखें ये 5 बातें
Deepfake के बारे में आपने काफी कुछ सुना होगा लेकिन क्या आप जानते हैं कि Deepfake क्या है और इसे आप कैसे पहचान सकते हैं।
Deepfake को लेकर चर्चा काफी तेज है. रश्मिका मंदाना केस के बाद से लोगों को इस मामले पर जागरुक किया जा रहा है. इस मामले पर 4 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. लेकिन फिर भी ये मामले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं. ऐसे में हम आपके लिए ऐसे कुछ टिप्स लाए हैं जिसके जरिए आप ये पहचान सकते हैं कि Deepfake कंटेंट को कैसे पहचाना जा सकता है. लेकिन इससे पहले ये जानेंगे कि आखिर Deepfake क्या है.
क्या है Deepfake?
डीपफेक एक मल्टीमीडिया कंटेंट है जिसमें किसी व्यक्ति के चेहरे या शरीर को एक अलग व्यक्ति की तरह दिखाया जाता है. इसमें एडिटिंग कर दी जाती है. इसके लिए ऑनलाइन कई टूल्स उपलब्ध हैं। इस तरह के कंटेंट को सबसे पहले 2014 में सिंथेटिक मीडिया कहा गया था। फिर बाद में, जैसे-जैसे इसे लोग पहचानने लगे तो 2017 में एक गुमनाम Reddit यूजर ने Deepfake नाम की प्लेलिस्ट बनाकर उसमें वीडियो डालने शुरू कर दिए. तब से इसे Deepfake कहा जाने लगा.
पहले Deepfake को इतना तवज्जो नहीं दिया जाता था और इन्हें केवल मनोरंजन के लिए या हंसने के लिए इस्तेमाल किया जाता था. लेकिन अब लोगों के चेहरे को किसी और के चेहरे से बदलकर उनमें अश्लीलता फैलाई जा रही है. कई लोग इस तरह की वीडियो बनाकर उन्हें वायरल करने का काम करते हैं. इन पर कई लोग विश्वास भी कर लेते हैं. जबकि ऐसा नहीं करना चाहिए. किसी भी वीडियो को सच मानने से पहले उसकी जांच करनी बेहद जरूरी है.
Deepfake कंटेंट को कैसे पहचानें:
- वीडियो किस तरह से शुरू हो रहा है इस बात का खास ख्याल रखें. जैसे, काफी लोग रश्मिका मंदाना को वीडियो में पहचानने में असफल रहे थे. इस वीडियो में जिस तकनीक का इस्तेमाल किया गया था वो वास्तव में लिफ्ट में घुसने के बाद से ही दिखाई दिया था. शुरूआत में जारा पटेल का ही चेहरा था.
- वीडियो की शुरुआत से लेकर आखिरी तक व्यक्ति के चेहरे के हाव-भाव को अच्छे से चेक करें. वीडियो में हाव-भाव लगातार बदलते रहेंगे. अगर ऐसा होता है तो यह वीडियो फेक है.
- लिप सिंक जरूर चेक करें. डीपफेक वीडियो में एक मामूली ऑडियो/वीडियो सिंक की दिक्कत जरूर होती है. किसी भी वायरल वीडियो को कई बार देखें. आपको सिंक की परेशानी जरूर नजर आएगी.
- वीडियो का सोर्स जरूर चेक करें. किसी भी तरह की जल्दबाजी न करें. सोर्स चेक करने के लिए आप गूगल पर भी चेक कर सकते हैं.
- आप Sentinel, WeVerify, Reality Defender और NewsGuard Misinformation Fingerprints जैसे ऑनलाइन टूल्स से चेक कर सकते हैं कि वीडियो सही है या नहीं.
Deepfake कंटेंट बनाने वालों की सजा क्या है:
अगर कोई भी व्यक्ति इस तरह के मामले में लिप्त पाया जाता है तो उसके खिलाफ आईपीसी की धारा के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सिर्फ यही नहीं, किसी की इमेज खराब करने के लिए जुर्माना भी लगाया जा सकता है। व्यक्ति ही नहीं, जिस प्लेटफॉर्म पर यह शेयर हुआ है उस सोशल मीडिया कंपनी के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। 36 घंटे के अंदर सोशल मीडिया कंपनियों को इस तरह का कंटेंट अपने प्लेटफॉर्म से हटाना होगा।