Budget 2026: क्या 1 फरवरी से बढ़ जाएंगे स्मार्टफोन के दाम? बजट में खुलेगा राज

1 फरवरी 2026 को बजट पेश किया जाएगा. लोगों के मन में एक सवाल है कि क्या बजट के बाद स्मार्टफोन महंगे हो जाएंगे, चलिए जानते हैं कि क्या सही में ऐसा होगा?

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Shilpa Srivastava

नई दिल्ली: जैसे-जैसे बजट पास आ रहा है, कंज्यूमर्स और इंडस्ट्री पर नजर रखने वालों की टेंशन बढ़ती जा रही है. साथ ही उन्हें एक सवाल यह भी परेशान कर रहा है कि क्या स्मार्टफोन की कीमतें बढ़ेंगी या घटेंगी. खैर, इस सवाल पर तो लोग भी नजर गढ़ाए हुए हैं. हर साल की तरह इस साल भी बजट में स्मार्टफोन की कीमतें कुछ ऊपर-नीचे होने की संभावना जताई जा रही है और यूजर्स के बीच यह एक बहस का विषय भी बन गया है.

भारतीय ब्रांड्स की बात करें तो पिछले साल कई भारतीय ब्रांड्स ने मार्केट में एंट्री की. इनकी एंट्री से चीनी कंपनियों को कड़ी टक्कर मिली. हालांकि, चीनी कंपनियों ने फोन की कीमतें नहीं बढ़ाई लेकिन सैमसंग ने साल के आखिरी तक कुछ मॉडल्स की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी. इससे यूजर्स इस चिंता में पड़ गए कि क्या आने वाला बजट कीमतों में और बढ़ोतरी कर सकता है. 

क्या बजट के बाद बढ़ जाएंगे स्मार्टफोन्स के दाम: 

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ग्लोबल डिमांड बढ़ती जा रही है. इसी के चलते मेमोरी जैसे जरूरी कंपोनेंट्स की कमी हो गई है. इससे ग्लोबल सप्लाई चेन पर भी काफी दबाव पड़ गया है. इन कॉस्ट के बढ़ने से स्मार्टफोन बनाने वालों के लिए प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ गई है, जिससे कंपनियों के पास फोन की कीमतें बढ़ाने के अलावा और कोई सॉल्यूशन नहीं बचता है. इसके साथ ही कुछ कंपनियां ऐसी भी हैं, जो फोन को महंगा नहीं करना चाहती हैं, क्योंकि इससे मार्केट की मोबिलिटी बिगड़ सकती है. इससे फोन की डिमांड पर भी असर पड़ सकता है.

कोर मैन्युफैक्चरिंग को देना होगा बढ़ावा:

भारत में अगर कैमरा मॉड्यूल, बैटरी, प्रिंटेड सर्किट बोर्ड जैसे कुछ जरूरी पार्ट्स को बनाया जाए, तो बेहतर होगा. इसके साथ ही रिसर्च और डेवलपमेंट, सिस्टम डिजाइन और सॉफ्टवेयर-आधारित इनोवेशन पर भी ज्यादा जोर देने की भी जरूरत है. अगर ऐसा होता है तो फोन की कीमत कुछ कम हो सकती है. 

हालांकि, ज्यादातर फोन भारत में ही असेंबल किए जाते हैं, लेकिन कई जरूरी कंपोनोंट्स बाहर से इंपोर्ट किए जाते हैं. इस वजह से फोन की कीमत ज्यादा होती है. इंडस्ट्री के लोगों का तर्क है कि बजट में टारगेटेड टैक्स इंसेंटिव और पॉलिसी सपोर्ट इन कंपोनेंट्स की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दे सकता है. इससे लागत कंट्रोल करने में मदद मिलेगी और फोन की कीमतों को स्थिर रखा जा सकेगा.