उत्तराखंड में पहली बार दिखेगा व्हाइट टाइगर, देहरादून जू में जल्द होगी एंट्री; MP और ओडिशा से आएंगे बाघ
उत्तराखंड को जल्द ही अपना पहला व्हाइट टाइगर मिलने वाला है. केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने देहरादून चिड़ियाघर में दो व्हाइट टाइगर लाने की अनुमति दे दी है. इन्हें मध्य प्रदेश और ओडिशा के चिड़ियाघरों से लाया जाएगा.
उत्तराखंड में अब तक किसी भी चिड़ियाघर में व्हाइट टाइगर नहीं है. ऐसे में केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की मंजूरी के बाद राज्य के वन्यजीव प्रेमियों में उत्साह बढ़ गया है. देहरादून चिड़ियाघर में इन बाघों के पहुंचने के बाद लोगों को सफेद बाघ देखने के लिए दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा.
दोनों व्हाइट टाइगर को मध्य प्रदेश के ग्वालियर चिड़ियाघर और ओडिशा के नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क से लाने की योजना है. अधिकारियों ने इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं.
वन्यजीव सप्ताह में पहुंच सकते हैं बाघ
अधिकारियों के मुताबिक, व्हाइट टाइगर को देहरादून लाने की प्रक्रिया पर काम शुरू हो चुका है. उम्मीद जताई जा रही है कि वन्यजीव सप्ताह के दौरान बाघों को देहरादून चिड़ियाघर लाया जा सकता है. इस स्थानांतरण के तहत देहरादून चिड़ियाघर से भी ग्वालियर चिड़ियाघर को एक सामान्य रंग का बाघ दिया जाएगा. यानी दोनों चिड़ियाघरों के बीच जानवरों का आदान-प्रदान किया जाएगा.
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देहरादून जू की प्रभारी और वन क्षेत्राधिकारी दीक्षा भट्ट ने इसे उत्तराखंड वन विभाग के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया. उनके अनुसार विभाग पिछले कई वर्षों से इस योजना पर काम कर रहा था. मंजूरी मिलने के बाद अब इसे जमीन पर उतारने की प्रक्रिया तेज हो गई है. वन मंत्री सुबोध उनियाल ने भी व्हाइट टाइगर के उत्तराखंड आने पर खुशी जताई है. उन्होंने कहा कि यह वन्यजीव प्रेमियों के साथ पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का बड़ा केंद्र बन सकता है.
नंदनकानन से आने वाले बाघ पर भी काम जारी
ओडिशा के नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क से भी एक व्हाइट टाइगर देहरादून लाने की मंजूरी मिल चुकी है. हालांकि इसके लिए परिवहन व्यवस्था और जानवरों के आदान-प्रदान से जुड़ी शर्तों को अंतिम रूप दिया जा रहा है. ओडिशा के साथ शुरुआती बातचीत में देहरादून चिड़ियाघर की ओर से हिमालयन गोरल की एक जोड़ी और नैनीताल से रेड पांडा की एक जोड़ी देने का प्रस्ताव भी रखा गया है.
उत्तराखंड भले ही पहली बार व्हाइट टाइगर का स्वागत करने जा रहा है, लेकिन सामान्य बाघों की संख्या के मामले में राज्य देश में प्रमुख स्थान रखता है. 2022 की अखिल भारतीय बाघ गणना के अनुसार उत्तराखंड में 560 बाघ दर्ज किए गए थे. मध्य प्रदेश 785 बाघों के साथ पहले और कर्नाटक 563 बाघों के साथ दूसरे स्थान पर था. उत्तराखंड तीसरे स्थान पर रहा. राज्य के कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में 260 बाघ दर्ज किए गए थे, जो देश के किसी भी बाघ अभयारण्य में सबसे अधिक संख्या बताई गई थी.