हरिद्वार जिले के खानपुर थाना इलाके के एक गांव में विवाह की तैयारियां पूरे जोश के साथ चल रही थीं. रुड़की से आई बारात का स्वागत धूमधाम से किया गया था. मेहमान भोजन का आनंद ले रहे थे और चारों तरफ उत्सव का माहौल था. जब जयमाला की रस्म के लिए दूल्हा और दुल्हन मंच पर पहुंचे तो सबकी नजरें उन पर टिकी थीं. इसी बीच दोनों के बीच हुई एक निजी बातचीत ने पूरे समारोह का माहौल पल भर में बदल दिया.
जानकारी के मुताबिक, कुछ समय पहले दूल्हा एक सड़क दुर्घटना में चोटिल हो गया था. जयमाला के दौरान उसने दुल्हन को बताया कि हादसे की वजह से उसकी सेहत पूरी तरह ठीक नहीं है और वह पहले की तरह काम करने में सक्षम नहीं रहेगा. उसने यह भी कहा कि नियमित नौकरी और घर की जिम्मेदारियां निभाना उसके लिए कठिन हो सकता है. यह बातचीत दुल्हन की सहेलियों ने सुन ली और तुरंत परिवार तक यह बात पहुंचा दी. इसके बाद माहौल में तनाव फैल गया.
जब दुल्हन के परिजनों को इस बात का पता चला तो उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी अहम जानकारी पहले क्यों साझा नहीं की गई. इसी मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई. स्थिति इतनी बिगड़ गई कि दुल्हन ने साफ तौर पर शादी की रस्में आगे बढ़ाने से मना कर दिया. उसने वरमाला पहनाने और फेरे लेने से इनकार कर दिया. काफी समझाने की कोशिशें हुईं, लेकिन वह अपने निर्णय पर कायम रही. हालात बिगड़ते देख किसी ने पुलिस को सूचना दी. खानपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों परिवारों से अलग अलग बात कर स्थिति को शांत करने की कोशिश की.
थानाध्यक्ष दिगपाल कोहली ने बताया कि आपसी बातचीत के बाद दोनों पक्ष इस नतीजे पर पहुंचे कि बिना किसी विवाद या कानूनी कार्रवाई के बारात को वापस भेज दिया जाए. किसी भी तरफ से लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई. यह घटना पूरे गांव और आसपास के क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई है. कुछ लोग दूल्हे की साफगोई की सराहना कर रहे हैं, तो कुछ दुल्हन के फैसले को सही ठहरा रहे हैं.