रास्ता बंद होते ही थम गई थी कैलाश यात्रा... अब आई बड़ी खुशखबरी, तीर्थयात्रियों के लिए फिर खुला अहम रूट

उत्तराखंड में भूस्खलन के कारण बंद हुआ कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग फिर से चालू हो गया है. बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) की प्रोजेक्ट हीराक टीम ने लगातार काम कर मलबा हटाया और सड़क को बहाल किया.

Pinterest
Reepu Kumari

उत्तराखंड में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. भूस्खलन के कारण बंद हुआ यात्रा मार्ग दोबारा बहाल कर दिया गया है. बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) की प्रोजेक्ट हीराक टीम ने लगातार अभियान चलाकर मलबा हटाया और सड़क को फिर से यातायात के लिए सुरक्षित बना दिया है. 10 जुलाई को हुए भूस्खलन के बाद इस महत्वपूर्ण मार्ग पर आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हो गई थी. इसके चलते कैलाश मानसरोवर यात्रा भी कुछ समय के लिए रुक गई थी. अब सड़क खुलने के साथ तीर्थयात्रियों और वाहनों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई है, जिससे यात्रा को नई गति मिली है.

भूस्खलन के बाद BRO ने संभाला मोर्चा

BRO के अनुसार, 10 जुलाई को कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर भारी भूस्खलन हुआ था, जिससे सड़क मलबे से भर गई और यातायात ठप हो गया. इसके बाद प्रोजेक्ट हीराक की टीम ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया. टीम ने लगातार काम करते हुए सड़क से मलबा हटाया और क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत कर मार्ग को फिर से चालू कर दिया.

रास्ता खुलते ही फिर शुरू हुई यात्रा

मार्ग बहाल होने के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा दोबारा शुरू हो गई है. सड़क बंद होने से यात्रा अस्थायी रूप से प्रभावित हुई थी और वाहनों की आवाजाही भी रुक गई थी. अब सड़क पूरी तरह संचालित होने से तीर्थयात्री अपने तय कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ सकेंगे. BRO ने बताया कि मार्ग को सुरक्षित बनाने के बाद ही यातायात बहाल किया गया है.

सीमावर्ती इलाकों में बुनियादी ढांचे पर BRO का फोकस

BRO ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क संपर्क बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है. संगठन ने दोहराया कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी उसकी टीमें लगातार काम करती हैं ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बनी रहे और धार्मिक यात्राएं बिना बाधा जारी रह सकें. संगठन ने इसे अपने दायित्व का अहम हिस्सा बताया.

किन लोगों के लिए खुली है यह यात्रा

कैलाश मानसरोवर यात्रा धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. हिंदू धर्म में इसे भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है, जबकि जैन और बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए भी इसका विशेष महत्व है. यह यात्रा उन भारतीय नागरिकों के लिए उपलब्ध है जिनके पास वैध भारतीय पासपोर्ट है और जो धार्मिक उद्देश्य से यात्रा करना चाहते हैं.

5 जुलाई को रवाना हुआ था पहला जत्था

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 5 जुलाई को चंपावत जिले के टनकपुर से कैलाश मानसरोवर यात्रा-2026 के पहले जत्थे को रवाना किया था. उन्होंने कहा था कि प्रदेश सरकार ने तीर्थयात्रियों की सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की हैं. यात्रा के दौरान कुमाऊं मंडल विकास निगम, जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस संयुक्त रूप से निगरानी कर रहे हैं.