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सीएम धामी ने पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट को दी अंतिम श्रद्धांजलि, परिजनों को दिया सांत्वना का संबल

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट के आवास पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर संवेदनाएं व्यक्त कीं और ढांढस बंधाया

@DIPR_UK
Sagar Bhardwaj

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी रविवार को देहरादून के डीएल रोड स्थित पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वर्गीय हीरा सिंह बिष्ट के निजी आवास पहुंचे. यहां उन्होंने दिवंगत नेता के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी. मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं और इस कठिन समय में धैर्य बनाए रखने का संदेश देते हुए उन्हें सांत्वना दी.

 निधन पर पहले भी जताया था गहरा शोक

मुख्यमंत्री धामी ने इससे पहले हीरा सिंह बिष्ट के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया था. उन्होंने कहा था कि सार्वजनिक जीवन में उनका योगदान लंबे समय तक याद रखा जाएगा. मुख्यमंत्री ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिवार को यह अपार दुख सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की थी.


राजनीतिक और श्रमिक आंदोलनों से रहा गहरा जुड़ाव

हीरा सिंह बिष्ट उत्तराखंड और अविभाजित उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक जाना-माना चेहरा रहे. वे दोनों राज्यों में कैबिनेट मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके थे. इसके अलावा उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक) के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं. उनके निधन की खबर से कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच शोक की लहर दौड़ गई.

तीन बार विधायक बनने का गौरव

हीरा सिंह बिष्ट का राजनीतिक सफर वर्ष 1985 में शुरू हुआ, जब वे पहली बार देहरादून विधानसभा क्षेत्र से उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए विधायक चुने गए. राज्य गठन के बाद उन्होंने 2002 में राजपुर विधानसभा सीट से जीत दर्ज की और 2014 के डोईवाला विधानसभा उपचुनाव में भी विजय हासिल कर कुल तीन बार विधायक बनने का गौरव प्राप्त किया. उनकी पहचान एक जमीनी और जनसरोकारों से जुड़े नेता के रूप में रही.

कई अहम विभागों की संभाली जिम्मेदारी

उत्तराखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री पंडित नारायण दत्त तिवारी के मंत्रिमंडल में हीरा सिंह बिष्ट ने कैबिनेट मंत्री के रूप में परिवहन, श्रम और तकनीकी शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों का दायित्व संभाला. अपने प्रशासनिक अनुभव और सरल कार्यशैली के कारण उन्होंने राजनीतिक जीवन में अलग पहचान बनाई. उनके निधन को उत्तराखंड की राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण क्षति माना जा रहा है, जबकि विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके योगदान को याद किया.