‘ट्रेक ऑफ द ईयर’ बनी चेनाप घाटी, हिमालय के बीच बसा यह फूलों का संसार है बेहद खास

उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित चेनाप घाटी अपनी दुर्लभ फूलों की प्रजातियों, ब्रह्मकमल की प्राकृतिक क्यारियों और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध हो रही है. यह घाटी प्रकृति प्रेमियों और ट्रेकिंग के शौकीनों को अनोखा अनुभव देती है.

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Kuldeep Sharma

चमोली: विश्व धरोहर फूलों की घाटी का नाम अक्सर सुर्खियों में रहता है, लेकिन चमोली जिले की चेनाप घाटी भी प्राकृतिक सुंदरता के मामले में किसी खजाने से कम नहीं है. समुद्र तल से करीब 13 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित यह घाटी हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियों के बीच बसी हुई है. यहां जून से अक्टूबर तक सैकड़ों प्रजातियों के दुर्लभ फूल खिलते हैं, जो पूरे क्षेत्र को रंगों की चादर से ढक देते हैं. हाल के वर्षों में यह ट्रेकिंग और प्रकृति पर्यटन का नया आकर्षण बनकर उभरी है.

प्रकृति का अनमोल उपहार

चेनाप घाटी अपनी अनोखी जैव विविधता के कारण खास पहचान रखती है. करीब पांच वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली इस घाटी में 400 से अधिक प्रजातियों के हिमालयी फूल खिलते हैं. यहां राज्य पुष्प ब्रह्मकमल की प्राकृतिक क्यारियां सबसे बड़ा आकर्षण हैं, जिन्हें स्थानीय लोग ‘फुलाना’ कहते हैं. जुलाई से सितंबर के बीच घाटी का हर कोना रंग-बिरंगे फूलों से सज जाता है. इसके अलावा यहां दुर्लभ वन्यजीव और औषधीय जड़ी-बूटियों की भरपूर मौजूदगी इसे शोधकर्ताओं और प्रकृति प्रेमियों के लिए भी महत्वपूर्ण बनाती है. शांत वातावरण और स्वच्छ हवा यहां आने वालों को अलग ही अनुभव कराती है.

कैसे पहुंचें चेनाप घाटी

जोशीमठ से चेनाप घाटी तक पहुंचने के लिए कई ट्रेकिंग मार्ग उपलब्ध हैं. थैंग गांव और मेलारी टाप होकर जाने वाले रास्ते सबसे अधिक लोकप्रिय हैं. मेलारी टाप से हिमालय की कई पर्वत शृंखलाओं का भव्य दृश्य दिखाई देता है. इसके अलावा बेनाकुली, खीरों और माकपाटा बुग्याल के रास्ते भी घाटी तक पहुंचा जा सकता है. वर्ष 2013 की आपदा के बाद जब फूलों की घाटी का मार्ग प्रभावित हुआ, तब प्रकृति प्रेमियों ने चेनाप घाटी की ओर रुख किया. इसी दौरान यह स्थान धीरे-धीरे पर्यटन मानचित्र पर उभरकर सामने आया.


बंगाल के पर्यटकों की पसंद

चेनाप घाटी के बारे में अभी भी बहुत कम लोग जानते हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल के पर्यटकों के बीच इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है. बेनाकुली से माकपाटा बुग्याल तक का लंबा ट्रेक उन्हें विशेष रूप से आकर्षित करता है. नंदा देवी के प्रति गहरी आस्था भी इसके पीछे एक बड़ा कारण है, क्योंकि माकपाटा बुग्याल नंदा देवी लोकजात यात्रा का प्रमुख पड़ाव माना जाता है. भीड़भाड़ से दूर यह क्षेत्र पर्यटकों को प्रकृति के बीच सुकून के पल बिताने का अवसर देता है. यही वजह है कि हर साल बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं.

यात्रा से पहले जरूरी तैयारी

चेनाप घाटी घूमने का सबसे उपयुक्त समय जून से सितंबर के बीच माना जाता है. ऊंचाई अधिक होने के कारण यहां मौसम तेजी से बदल सकता है और तापमान अचानक गिर सकता है. इसलिए यात्रा से पहले स्वास्थ्य जांच कराना बेहतर माना जाता है. गर्म कपड़े, जरूरी दवाइयां, पानी, भोजन, टेंट और स्लीपिंग बैग साथ रखना आवश्यक है. जोशीमठ और थैंग गांव में ठहरने की व्यवस्था उपलब्ध है, जहां स्थानीय संस्कृति और पारंपरिक पहाड़ी भोजन का आनंद भी लिया जा सकता है. तीन दिन का यह ट्रेक रोमांच, प्राकृतिक सुंदरता और यादगार अनुभवों से भरपूर माना जाता है.