UP में कौन संभालेगा अखिलेश यादव की गद्दी? चाचा शिवपाल या फिर कोई और बनेगा विधानसभा का नेता विपक्ष

Leader of Opposition of UP Assembly: उत्तर प्रदेश विधानसभा सत्र की शुरुआत 29 जुलाई से हो रही है. मॉनसून सत्र को लेकर तैयारियां शुरू हो रही हैं. समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव सांसद बनकर दिल्ली चले गए हैं. ऐसे में यूपी विधानसभा में नेता विपक्ष का पद खाली हो गया है. नेता विपक्ष के लिए तीन नामों की चर्चा चल रही है. 28 जुलाई को अखिलेश यादव ने पार्टी नेताओं की बैठक बुलाई है. इस बैठक में सपा अपने विधायक दल का नेता चुनेगी.

Social Media
Gyanendra Tiwari

Leader of Opposition of UP Assembly: यूपी विधानसभा सत्र की शुरुआत 29 जुलाई से हो रही है. विधानसभा के मॉनसून सत्र को लेकर समाजवादी पार्टी तैयारियां कर रही है. तैयारी विधायक दल के नेता की. बीजेपी के बाद यूपी में सबसे बड़ी पार्टी सपा ही है. सांसद बनने से पहले जब अखिलेश विधायक थे तो वह विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हुआ करते थे. लेकिन अब सांसद बनने के बाद उन्हें विधायकी से इस्तीफा देना पड़ा है. ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि आखिर अखिलेश के बाद यूपी में उनकी जगह कौन लेगा? जवाब में तीन नाम रेस में आगे दौड़ रहे हैं.

अखिलेश यादव ने रविवार को पार्टी के विधायकों की बैठक बुलाई है. सुबह 10 बजे पार्टी ऑफिस में बैठक शुरू होगी. इस बैठक में ये फैसला होगा कि आखिर यूपी विधानसभा में नेता विपक्ष की भूमिका कौन निभाएगा?

इन 3 नामों से एक को मिल सकती है नेता विपक्ष की कुर्सी

रविवार को समाजवादी पार्टी के विधायक दल का नेता चुना जाना है. विधानसभा में नेता विपक्ष बनने के लिए सपा के तीन नेताओं के नाम सबसे आगे रहे हैं. रेस में इन्हीं नामों को तरजीह दी जा रही है. कहा जा रहा है कि इन तीन नामों में से किसी को अखिलेश यादव विधानसभा का नेता विपक्ष बना सकते हैं. इसमें पहले नाम उनके चाचा शिवपाल यादव का है.  दूसरा नाम इंद्रजीत सरोज और तीसरा रामअचल राजभर.

चाचा के पक्ष में नहीं है अखिलेश यादव

बताया जा रहा है कि अखिलेश यादव चाचा शिवपाल यादव के पक्ष में नहीं हैं. वो नहीं चाहते कि चाचा विपक्ष के नेता के रूप में भूमिका निभाएं कारण है परिवारवाद.  लोकसभा में अखिलेश और राज्य सभा में चाचा रामगोपाल यादव संसदीय दल के नेता हैं. ऐसे में यादव परिवार के लोग पहले से ही प्रमुख पदों पर बने हुए हैं. इस कारण अखिलेश PDA का फार्मूला को अपनाते हुए या तो इंद्रजीत सरोज या फिर रामअचल राजभर को नेता विपक्ष की जिम्मेदारी दे सकते हैं.

लोकसभा चुनाव के फॉर्मूले पर चलेंगे अखिलेश यादव   

लोकसभा चुनाव में अखिलेश का पीडीए फॉर्मूला हिट हुआ था. इसी एजेंडे के साथ वह आगे बढ़ सकते हैं. इंद्रजीत सरोज दलित समाज से आते हैं. उनके नेता विपक्ष चुने जाने से पार्टी की ओर से दलित समाज को एक अच्छा मैसेज जाएगा जो सपा को 2027 में फायदा दिला सकता है. वहीं, रामअचल राजभर अति पिछड़े समुदाय से आते हैं अगर उनको यूपी विधानसभा में नेता विपक्ष बनाया जाता है तो भी सपा को फायदा हो सकता है.

पार्टी का एक वर्ग शिवपाल के साथ तो दूसरा खिलाफ

पार्टी में एक बड़ा वर्ग ये चाहता है कि शिवपाल यादव को यूपी विधानसभा का नेता विपक्ष बनाया जाए. वहीं अखिलेश के करीबियों का ये मानना है कि 105 विधायकों की कमान शिवपाल को सौंपना सही नहीं रहेगा. लोकसभा चुनाव के नतीजों को देखते हुए सपा दलित चेहरा या फिर गैर यादव पिछड़ा चेहरे को विधानसभा में नेता विपक्ष की जिम्मेदारी दे सकती है.

पार्टी के एक नेता ने कहा कि शिवपाल को सभी नेता जानते हैं. उनके अंदर सभी विधायकों को जोड़कर रखने की क्षमता है. हालांकि, विधानसभा चुनाव को देखते हुए ऐसे नेता को नेता विपक्ष की जिम्मेदारी दी जा सकती है जो पार्टी के हित में हो. 

इस वर्ग का नेता बनेगा यूपी विधानसभा का नेता विपक्ष

अखिलेश यादव पीडीए के नेता को विधानसभा में नेता विपक्ष बनाएंगे. पीडीए यानी पिछड़ा वर्ग, दलित और अल्पसंख्यक समाज. इसी फॉर्मूले पर अखिलेश यादव ने लोकसभा का चुनाव लड़ा था. इंद्रजीत सरोज और राम अचल राजभर पीडीए से आते हैं. PDA फॉर्मूले ने समाजवादी पार्टी को एमवाई फॉर्मूले के वोट बैंक को आगे बढ़ाया. यादव और मुस्लिम मतदाता सपा का पारंपरिक मतदाता रहा है. ये वोटर सपा छोड़कर कहीं नहीं जाने वाले. ऐसे में अखिलेश का पीडीए फॉर्मूला वोट बैंक में इजाफा करने की दृष्टिकोण से काफी अहम माना जा रहा है.

इंद्रजीत सरोज 2017 से पहले भाजपा में थे. वह मायावती के करीबियों में से एक थे. लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने सपा का दामन थाम लिया था. इस समय वह मंझनपुर से विधायक हैं. इसके साथ ही वह समाजवादी पार्टी के महासचिव भी हैं. पासी समुदाय पर इंद्रजीत सरोज की पकड़ है.  

राम अचल राजभर 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा में शामिल हुए थे. उससे पहले वह बसपा में था. इस समय वह अकबरपुर से विधायक हैं. गैर यादव ओबीसी समाज का वह एक बड़ी चेहरा है. पूर्वी यूपी में उनकी अच्छी पकड़ है.