सपा के वरिष्ठ आदिवासी नेता विजय सिंह गोंड का निधन, अखिलेश यादव ने जताया शोक

समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता विजय सिंह गोंड का गुरुवार को निधन हो गया. वे 71 वर्ष के थे और लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे.

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Gyanendra Sharma

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में आदिवासी समाज के प्रमुख चेहरे और समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता विजय सिंह गोंड का गुरुवार को निधन हो गया. वे 71 वर्ष के थे और लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे. लखनऊ के संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एसजीपीजीआई) में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली. उनके निधन से सोनभद्र जिले सहित पूरे क्षेत्र में शोक व्याप्त हो गया है.

विजय सिंह गोंड सोनभद्र की दुद्धी विधानसभा सीट से विधायक थे, जो उत्तर प्रदेश की 403वीं और अंतिम विधानसभा सीट मानी जाती है. वे आदिवासी राजनीति के मजबूत स्तंभ थे और क्षेत्र के लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय थे. लंबी बीमारी के कारण उनकी दोनों किडनियां खराब हो गई थीं, जिसके चलते उन्हें कई महीनों से अस्पताल में भर्ती रखा गया था. निधन की खबर मिलते ही समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों में मातम छा गया.

अखिलेश यादव ने जताया शोक

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया. खबर मिलते ही अखिलेश यादव एसजीपीजीआई पहुंचे और परिजनों से मिलकर ढांढस बंधाया. उन्होंने कहा कि विजय सिंह गोंड ने जीवनभर आदिवासी समुदाय की सेवा की और उनके अधिकारों के लिए संघर्ष किया. जनता ने भी उन्हें बार-बार सेवा का अवसर देकर उनका सम्मान किया. अखिलेश ने उन्हें पार्टी और समाज के लिए अपूरणीय क्षति बताया.

आठ बार विधायक बने

विजय सिंह गोंड का राजनीतिक सफर प्रेरणादायक रहा. उन्होंने 1980 में कांग्रेस के टिकट पर पहली बार दुद्धी सीट से चुनाव जीता. इसके बाद विभिन्न दलों से जुड़ते हुए वे कुल आठ बार विधायक बने. मुलायम सिंह यादव सरकार में वे राज्य मंत्री भी रहे. 2024 के उपचुनाव में समाजवादी पार्टी के टिकट पर उन्होंने भाजपा उम्मीदवार को हराकर फिर से सीट जीती थी. आदिवासी हितों को सदन में मजबूती से उठाने के लिए उन्हें क्षेत्र में 'आदिवासी राजनीति के पितामह' के रूप में जाना जाता था.

परिजनों के अनुसार, उनका पार्थिव शरीर गुरुवार शाम तक दुद्धी पहुंचेगा और अंतिम संस्कार शुक्रवार को उनके पैतृक गांव में किया जाएगा. उनके निधन से न केवल समाजवादी पार्टी बल्कि पूरे आदिवासी समुदाय को गहरा झटका लगा है. कई राजनीतिक दलों के नेताओं ने उनके निधन पर शोक संदेश जारी किए हैं.