कौन हैं कृष्ण मोहन? जिन्हें चंपत राय की जगह बनाया गया महासचिव; बताया आगे का पूरा रोडमैप
राम मंदिर ट्रस्ट ने महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए हैं. अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी कृष्ण मोहन को सौंपी गई है. उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और ट्रस्ट में पारदर्शिता बढ़ाने का भरोसा दिलाया.
अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने चढ़ावा चोरी विवाद के बीच बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है. ट्रस्ट की बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए. उनकी जिम्मेदारियां फिलहाल कृष्ण मोहन को सौंपी गई हैं. बैठक के बाद ट्रस्ट की ओर से बताया गया कि भविष्य में पारदर्शिता और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी ताकि श्रद्धालुओं का भरोसा और मजबूत हो सके.
ट्रस्ट की बैठक के बाद कृष्ण मोहन ने अंतरिम महासचिव का कार्यभार संभाल लिया. उन्होंने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना होगी. उन्होंने भरोसा दिलाया कि ट्रस्ट के संचालन में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए हर जरूरी कदम उठाया जाएगा.
प्रबंधन की कमियों को दूर करने पर जोर
कृष्ण मोहन ने स्वीकार किया कि प्रबंधन और संचालन में कुछ कमियां रह गई थीं, जिनका कुछ लोगों ने गलत फायदा उठाया. उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा. साथ ही दान से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने की दिशा में भी काम होगा.
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कौन हैं कृष्ण मोहन?
73 वर्षीय कृष्ण मोहन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी और पूर्व भारतीय वन सेवा अधिकारी रह चुके हैं. वह हरदोई के निवासी हैं और पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र संघ चालक की जिम्मेदारी निभा चुके हैं. पिछले वर्ष उन्हें श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का सदस्य बनाया गया था.
चढ़ावा चोरी विवाद कैसे शुरू हुआ?
राम मंदिर के दानपात्रों में जमा चढ़ावे को लेकर कथित गड़बड़ी का मामला जून में सामने आया था. विवाद बढ़ने के बाद राज्य सरकार ने विशेष जांच दल का गठन किया. जांच के दौरान एसआईटी ने प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंपी और मामले में कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की.
जांच जारी, पारदर्शिता पर रहेगा फोकस
अब तक एसआईटी इस मामले में आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है. ये सभी दानपात्रों से प्राप्त चढ़ावे की गिनती और संबंधित प्रक्रिया से जुड़े बताए गए हैं. ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखने के लिए हर स्तर पर पारदर्शिता अपनाई जाएगी और दान व्यवस्था को पहले से अधिक मजबूत बनाया जाएगा.