राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा फेरबदल, चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर, अब कृष्ण मोहन संभालेंगे सारा कामकाज

राम मंदिर ट्रस्ट ने महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए हैं. ट्रस्ट की बैठक के बाद कृष्ण मोहन को दोनों की जिम्मेदारियां सौंपी गईं.

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Ashutosh Rai

अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव सामने आया है. ट्रस्ट की विशेष बैठक में महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए. इसके बाद दोनों की जिम्मेदारियां फिलहाल कृष्ण मोहन को सौंप दी गई हैं. ट्रस्ट ने पूरे मामले को संविधान के अनुसार लिया गया निर्णय बताया.

ट्रस्ट की बैठक में नियमों के अनुसार लिया गया फैसला

राम मंदिर ट्रस्ट की अहम बैठक के बाद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी महाराज ने मीडिया को पूरी जानकारी दी. उन्होंने कहा कि यह बैठक बेहद खास और भावनात्मक माहौल में हुई. उन्होंने माना कि हाल की घटनाओं से सभी लोग दुखी हैं और ट्रस्ट की छवि को लेकर चिंता भी है. उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण के लिए कई लोगों ने अपना जीवन समर्पित किया है, इसलिए किसी भी तरह की अनियमितता की खबर दुख पहुंचाने वाली है. बैठक में पूर्व महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर चर्चा हुई. वरिष्ठ विधि विशेषज्ञ के. पारासरण ने ऑनलाइन बैठक में हिस्सा लेते हुए ट्रस्ट के संविधान का हवाला दिया और बताया कि नियमों के अनुसार इस्तीफा दिए जाने के बाद उसे स्वीकार करना अनिवार्य है. इसके बाद ट्रस्ट ने दोनों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए.

कृष्ण मोहन को सौंपी गई अंतरिम जिम्मेदारी

बैठक के बाद ट्रस्ट ने यह भी साफ किया कि फिलहाल नया महासचिव घोषित नहीं किया गया है. जब तक नए पदाधिकारी का फैसला नहीं होता, तब तक कृष्ण मोहन दोनों पदों से जुड़े सभी काम संभालेंगे. ट्रस्ट का कहना है कि प्रशासनिक काम बिना किसी रुकावट के चलते रहें, इसलिए यह अंतरिम व्यवस्था की गई है. गोविंद देव गिरी महाराज ने बताया कि चंपत राय ने पहले ही अपना इस्तीफा सौंप दिया था. बैठक का मुख्य उद्देश्य उसी पर अंतिम निर्णय लेना था.


चंपत राय की सेवाओं का किया गया सम्मान

बैठक में सिर्फ इस्तीफा स्वीकार करने की प्रक्रिया ही नहीं हुई, बल्कि चंपत राय के लंबे योगदान को भी याद किया गया. ट्रस्ट के सदस्यों ने उनके काम की सराहना करते हुए कहा कि राम मंदिर निर्माण और उससे जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों में उनकी भूमिका अहम रही है. ट्रस्ट ने साफ किया कि यह फैसला किसी व्यक्तिगत मतभेद का परिणाम नहीं, बल्कि ट्रस्ट के संविधान के अनुसार लिया गया कदम है. आने वाले समय में नई जिम्मेदारियों और संगठन की अगली व्यवस्था को लेकर अलग बैठक की जा सकती है.