महाशिवरात्रि पर गोपेश्वर महादेव मंदिर में गोपी रूप में हुए शिव के दर्शन, जानें क्या है इसके पीछे की मान्यता?
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर धर्मनगरी वृन्दावन स्थित प्राचीन गोपेश्वर महादेव मंदिर में चार पहर की आरती का भव्य आयोजन किया गया. इस दौरान भगवान शिव को गोपियों की तरह सजाया जाता है.
वृन्दावन: महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर धर्मनगरी वृन्दावन स्थित प्राचीन गोपेश्वर महादेव मंदिर में चार पहर की आरती का भव्य आयोजन किया गया. तड़के ब्रह्ममुहूर्त से ही मंदिर परिसर में भगवान के दर्शन को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. भक्तों का मानना है कि महाशिवरात्रि पर चारों पहर की आरती करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.
महादेव का गोपी रूप में हुआ सोलह श्रृंगार
पहली आरती से पूर्व मंदिर के सेवायत गोस्वामियों ने विधि-विधान से भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक किया. दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बने पंचामृत से अभिषेक के बाद वैदिक मंत्रोच्चार और हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा.
अभिषेक के उपरांत भगवान शिव का विशेष श्रृंगार किया गया. यहां की परंपरा के अनुसार महाशिवरात्रि पर शिव का गोपी रूप में सोलह श्रृंगार किया जाता है. आभूषण, चुनरी, श्रृंगार सामग्री और पुष्पों से सुसज्जित गोपी रूप में भक्तों को दर्शन दिए गए.
महारास में पहुंचे थे भगवान शिव
वृन्दावन में भगवान शिव का यह स्वरूप अत्यंत अनोखा और दुर्लभ माना जाता है. मान्यता है कि द्वापर युग में जब श्रीकृष्ण वृन्दावन में गोपियों के साथ महारास रचाते थे, तब देवताओं में भी उस दिव्य लीला को देखने की उत्सुकता रहती थी.
भगवान शिव के मन में भी महारास के दर्शन और उसमें सम्मिलित होने की तीव्र इच्छा हुई. जब वे रास स्थल पर पहुंचे तो गोपियों ने उन्हें यह कहकर रोक दिया कि इस लीला में केवल गोपियां ही प्रवेश कर सकती हैं.
माता यमुना ने किया था गोपी रूप में श्रृंगार
कथा के अनुसार तब माता पार्वती के संकेत पर शिव यमुना तट पर पहुंचे, जहां यमुना माता ने उनका गोपी के रूप में श्रृंगार किया. गोपी रूप धारण कर भगवान शिव महारास में सम्मिलित हुए. कहा जाता है कि लीला के पश्चात राधारानी और श्रीकृष्ण ने शिव के इस स्वरूप की पूजा की और उनसे ब्रज में इसी रूप में विराजमान रहने का आग्रह किया. तभी से वे ‘गोपेश्वर महादेव’ के नाम से विख्यात हुए.
चार पहर की होती है आरती
मंदिर से जुड़ी एक और मान्यता के अनुसार इसका निर्माण श्रीकृष्ण के प्रपौत्र वज्रनाभ ने कराया था. यह विश्व का एकमात्र मंदिर माना जाता है, जहां महादेव का महिलाओं की तरह श्रृंगार किया जाता है. महाशिवरात्रि पर चार पहर की आरती—प्रथम, द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ प्रहर—विशेष रूप से की जाती है, जिसमें हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं.
पूरे दिन मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन, रुद्राभिषेक और प्रसाद वितरण का क्रम चलता रहा. सुरक्षा और व्यवस्था के लिए स्थानीय प्रशासन भी मुस्तैद दिखाई दिया. श्रद्धालुओं ने गोपी रूप में सजे भगवान शिव के दर्शन कर स्वयं को धन्य बताया और ब्रज की इस अद्भुत परंपरा पर गर्व व्यक्त किया.
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