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Kundarki bypoll Result: 64% मुसलमान और 11 मुस्लिम प्रत्याशियों के बीच में योगी बने वीर, सपा के रिजवान पर भारी पड़े रामवीर

Kundarki bypoll Result: उत्तर प्रदेश के 9 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की गिनती जारी है. सभी की निगाहें उन सीटों पर हैं जहां अखिलेश यादव ने मुस्लिम कैंडिडेट्स को टिकट दिया था. कुंदरकी सीट जिसे मुस्लिमों का गढ़ माना जाता है. यहां पर योगी के रामवीर ने लगभग कमल खिला दिया है.

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Gyanendra Tiwari

Kundarki bypoll Result:  उत्तर प्रदेश के 9 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में कुंदरकी सीट का नतीजा सबसे चौंकाने वाला रहा. मुस्लिम बहुल इस क्षेत्र में भाजपा के रामवीर सिंह ठाकुर ने एक अप्रत्याशित जीत हासिल करने के करीब हैं. मुरादाबाद जिले की इस सीट पर 64 प्रतिशत मुस्लिम आबादी के बावजूद रामवीर की बढ़त न सिर्फ ऐतिहासिक मानी जा रही है, बल्कि यह राजनीतिक समीकरणों को नया आयाम भी देती है.

कुंदरकी सीट पर इस बार कुल 13 प्रत्याशी मैदान में थे, जिनमें से 11 मुस्लिम थे. इसके बावजूद भाजपा प्रत्याशी रामवीर सिंह ठाकुर ने रिकॉर्ड बढ़त बना ली है. अब उन्हें हराया नामुमकिन है.  समाचार लिखे जाने तक, रामवीर सिंह को 1,45,000 वोट मिले, जबकि सपा के मोहम्मद रिजवान 17,560 वोट के साथ दूसरे स्थान पर चल रहे हैं. तीसरे स्थान पर रहे चांद बाबू को अभी तक 11,039 वोट मिले.

औवेसी की पार्टी एआईएमआईएम के मोहम्मद वारिश समेत अन्य प्रत्याशी 6,000 से कम वोट ही जुटा पाए. बाकी प्रत्याशियों की स्थिति और भी कमजोर रही, जिनके हिस्से में केवल दहाई या सैकड़े की संख्या में वोट आए.

मुस्लिम बहुल सीट पर योगी के रामवीर का कमाल

कुंदरकी सीट का जातीय समीकरण बेहद दिलचस्प है. यहां मुस्लिम आबादी करीब 64 प्रतिशत है, जिसमें तुर्क और राजपूत मुस्लिमों का वर्चस्व है. तुर्क मुसलमानों की संख्या लगभग 40,000 है, जबकि मुस्लिम राजपूतों की संख्या 45,000 के आसपास है. इसके अलावा, अन्य मुस्लिम जातियों की संख्या 1,10,000 के करीब है.

भाजपा ने इन जातीय विभाजनों को समझते हुए अपनी रणनीति तैयार की. तुर्क और राजपूत मुस्लिम मतदाताओं को साधने के लिए पार्टी ने सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर फोकस किया, जिससे उन्हें निर्णायक बढ़त मिली.

भाजपा की रणनीति ने कैसे किया काम?

भाजपा ने इस उपचुनाव में एक ऐसी रणनीति अपनाई जिसने परंपरागत वोट बैंक की राजनीति को चुनौती दी. मुस्लिम मतदाताओं के बीच 11 प्रत्याशियों की मौजूदगी ने वोटों को विभाजित कर दिया. यह बिखराव भाजपा के लिए फायदेमंद साबित हुआ. भाजपा ने कुंदरकी में सांप्रदायिक मुद्दों की बजाय विकास और सामाजिक सुधारों को प्राथमिकता दी. यह रणनीति तुर्क और मुस्लिम राजपूत समुदायों के एक हिस्से को भाजपा के करीब लाने में सफल रही.

कुंदरकी में हिंदू मतदाता, जो अल्पसंख्यक हैं, भाजपा के पक्ष में एकजुट रहे. यह एकता रामवीर सिंह ठाकुर की जीत का आधार बनी.