लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की मजबूती परखने के लिए बड़ा तकनीकी सर्वे, 122 नमूने जुटाए

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर दो जगह सड़क धंसने और दरारें आने के बाद जांच तेज हो गई है. चार एजेंसियां 61 स्थानों से 122 नमूने लेकर निर्माण गुणवत्ता और जलनिकासी की जांच कर रही हैं.

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Meenu Singh

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर सड़क के कुछ हिस्सों में आई परेशानी के बाद अब इसकी तकनीकी जांच का काम तेज कर दिया गया है. शनिवार को किलोमीटर 63.9 और 30.3 पर सड़क धंसने की जानकारी सामने आई. इसके अलावा दो अन्य स्थानों पर तारकोल की ऊपरी परत में दरारें भी मिलीं. इन हिस्सों में मरम्मत का काम कराया जा रहा है, जबकि यातायात को कुछ दूरी तक वैकल्पिक मार्ग से निकाला जा रहा है. मामले की वास्तविक वजह पता लगाने के लिए व्यापक तकनीकी सर्वे शुरू किया गया है. इसके तहत चार एजेंसियां अलग-अलग स्थानों से सड़क, मिट्टी और निर्माण सामग्री के नमूने ले रही हैं. कुल 61 जगहों पर ड्रिलिंग करके 122 नमूने जुटाए गए हैं. इन नमूनों की प्रयोगशाला जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सड़क की मौजूदा स्थिति के पीछे तकनीकी या भौगोलिक कारण क्या हैं.

61 स्थानों पर ड्रिलिंग, 122 नमूने जुटाए

एक्सप्रेसवे की मौजूदा स्थिति का आकलन करने के लिए चार एजेंसियों को थर्ड पार्टी सर्वे की जिम्मेदारी दी गई है. कानपुर के आजाद चौक से लखनऊ की दिशा में एलिवेटेड पुल से पहले तक अलग-अलग स्थानों पर जांच की जा रही है. इस दौरान 61 जगहों पर ड्रिलिंग कर 122 नमूने लिए गए हैं. इन नमूनों में बिटुमिन, कंक्रीट और मिट्टी शामिल हैं. नमूने जुटाने के बाद उन्हें सुरक्षित तरीके से प्रयोगशालाओं में भेजा जा रहा है. वहां उनकी गुणवत्ता और मजबूती की जांच होगी. रिपोर्ट से सड़क की अलग-अलग परतों और इस्तेमाल की गई सामग्री की स्थिति को समझने में मदद मिलेगी.

सड़क की आठ अहम तकनीकी कसौटियों पर जांच

सर्वे के दौरान सड़क की कई तकनीकी परतों और उनकी मजबूती को जांच के दायरे में रखा गया है. सड़क की मोटाई, भार सहने की क्षमता, सब बेस, बेस कोर्स और ऊपरी सतह की गुणवत्ता की जांच की जाएगी. इसके साथ ही मिट्टी की स्थिति को भी तकनीकी तौर पर परखा जा रहा है. जांच में जलनिकासी व्यवस्था और निर्माण के दौरान मौसम की परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाएगा. विशेषज्ञ यह समझने की कोशिश करेंगे कि बारिश के पानी का सड़क की निचली परतों पर कितना प्रभाव पड़ा है. इन सभी पहलुओं को मिलाकर सड़क में आई परेशानी की संभावित वजह सामने लाने की कोशिश होगी.


कोर कटिंग से पता चलेगी परतों की स्थिति

प्रभावित हिस्सों में थर्ड पार्टी एजेंसियों की ओर से कोर कटिंग की जा रही है. इस प्रक्रिया के जरिए सड़क की अलग-अलग परतों के नमूने निकाले जाते हैं. इन नमूनों की मदद से यह पता लगाने की कोशिश होगी कि सड़क में इस्तेमाल सामग्री निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप मजबूती रखती है या नहीं. सड़क की मोटाई और उसकी विभिन्न परतों की शुरुआती जांच मौके पर की जा रही है. हालांकि अंतिम निष्कर्ष प्रयोगशाला में विस्तृत परीक्षण के बाद ही सामने आएगा. इसके साथ ही सड़क पर दिखाई दे रही दरारों की बनावट और उनके फैलाव का भी तकनीकी अध्ययन किया जा रहा है.

IIT खड़गपुर और NIT के विशेषज्ञ भी प्रक्रिया में शामिल

जांच प्रक्रिया में आईआईटी खड़गपुर और एनआईटी से जुड़े विशेषज्ञों की निगरानी भी शामिल है. सक्षम सर्वे सॉल्यूशन, एनएसबी, क्यूब हाईवे और एनटीसी को अलग-अलग हिस्सों में नमूने जुटाने की जिम्मेदारी दी गई है. सर्वे के लिए नेशनल सर्वे व्हीकल और ड्रिलिंग मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है. शनिवार को भी प्रभावित और संबंधित हिस्सों में नमूने लेने का काम जारी रहा. अलग-अलग स्थानों से जुटाए गए सैंपलों की प्रयोगशाला जांच पूरी होने के बाद सड़क की स्थिति को लेकर ज्यादा स्पष्ट तस्वीर सामने आने की उम्मीद है.

मरम्मत के दौरान करीब पांच किलोमीटर यातायात डायवर्ट

सड़क धंसने वाले दो स्थानों के अलावा दो अन्य हिस्सों में तारकोल की सतह पर दरारें मिली हैं. इन प्रभावित जगहों पर मरम्मत का काम चल रहा है. इसके चलते एक्सप्रेसवे के अलग-अलग हिस्सों में करीब पांच किलोमीटर तक यातायात डायवर्ट किया गया है. फिलहाल जांच का मुख्य उद्देश्य सड़क की मौजूदा स्थिति और समस्या के संभावित कारणों को तकनीकी आधार पर समझना है. प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति को लेकर अंतिम तस्वीर साफ होगी. इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि सड़क की परेशानी का संबंध निर्माण सामग्री, मिट्टी की प्रकृति, बारिश, जलनिकासी या किसी अन्य तकनीकी कारण से है.