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गर्लफ्रेंड का काट दिया था गला, 78 दिन में हो गई उम्रकैद; सजा पाने के बाद भी हंसता रहा आशिक!

Bulandshahr: बुलंदशहर में अदालत ने हत्या के एक केस का निपटारा 78 दिनों में ही कर दिया. कोर्ट ने चार्जशीट दाखिल होने के अगले 13 कार्यदिवसों में सुनवाई पूरी करके आरोपी को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई. अपराधी को अपनी ही प्रेमिका की हत्या करने के आरोप में उम्र कैद की सजा सुनाई है.

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गर्लफ्रेंड का काट दिया था गला, 78 दिन में हो गई उम्रकैद; सजा पाने के बाद भी हंसता रहा आशिक!
Courtesy: Social Media

Bulandshahr: बुलंदशहर में एक आशिक ने अपनी गर्लफ्रेंड का गला रेतकर हत्या कर दी थी. हत्या के 78 दिन बाद ही कोर्ट ने इस केस की सुनवाई पूरी करके आरोपी को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई. सजा सुनाए जाने के बाद भी दोषी के चेहरे में थोड़ी भी शिकन नहीं थी. इसीलिए कोर्ट ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई. कातिल का नाम अदनान उर्फ बल्लू है. उसने अपनी प्रेमिरका आसमां को मौत के घाट उतारने के बात खुद ही अपना गुनाह कबूल किया था. गुनाह को कबूल करने का उसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. कत्ल करने के बाद भी कातिल को अपनी गलती का कोई पछतावा नहीं था. 

कातिल बल्लू बेशर्मी के साथ कत्ल की कहानी सुनाया करता था. लेकिन अब उसके साथ जेल के सलाखों के पीछे चली गईं. बुलंदशहर के खुर्जा में बल्लू ने अपनी प्रेमिका आसमां का कत्ल किया था. मारने के बाद उसने खीरखानी के कब्रिस्तान में आसमां के शव को दफना दिया था. 

पति ने दर्ज कराया था मुकदमा

आसमां के पति सलीम ने अदनान के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था. पुलिस ने जब इस मामले की जांच की तो अदनान ने अपना जुर्म कबूल कर लिया. पुलिस ने उस चाकू को भी बरामद किया जिससे अदनान ने आसमां का सिर कलम किया था. 

13 कार्य दिवस में कोर्ट ने सुना दिया फैसला

30 जुलाई को पुलिस ने इस केस की चार्शशीट दाखिल की थी. 13 कार्य दिवस में कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई. आजीवन कारावास के साथ कोर्ट ने 52 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया. अदनान ने जुर्म कबूल करते हुए बताया कि उसने आसमां का गला काटा क्योंकि उसने उसे प्यार में धोखा दिया था. प्यार और दोस्ती में धोखा देने वालों का गला काटने में कोई गुरेज नहीं. उसने ये भी बताया कि वह खलनायक फिल्म के किरदार बल्लू बलराम से बहुत प्रभावित है. 

वकील ने क्या कहा?

वकील ने बताया कि अपराध विरल से विरलतम की श्रेणी में नहीं है लेकिन अपराधी को अपने अपराध पर न तो अफसोस है और न ही अपने किए पर पछतावा है. इस तरह के अपराधी को आजीवन या फिर मृत्यूदंड देने से समाज में एक कड़ा संदेश जाता है ताकि कोई भी इस तरह का कृत्य करने की सोचे भी न.