जालंधर में 1.46 लाख मतदाताओं को SIR का नोटिस, मैपिंग न होने पर सत्यापन जरूरी
एसआईआर सर्वे का पहला चरण 25 जून से तीन अगस्त तक चला. इस दौरान जिले के कुल 16 लाख 49 हजार 946 मतदाताओं के घर-घर जाकर बूथ स्तर के अधिकारियों ने इन्यूमरेशन फॉर्म बांटे. इनमें से करीब 14 लाख 64 हजार 949 लोगों ने फॉर्म जमा कर दिए, जबकि लगभग 1 लाख 84 हजार 997 मतदाताओं तक फॉर्म नहीं पहुंच सके.
जालंधर: पंजाब के जालंधर जिले में विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान लगभग 1.46 लाख मतदाताओं को सत्यापन के लिए नोटिस जारी किए गए हैं. इन मतदाताओं की मैपिंग पुरानी सूची से नहीं हो पाई थी, जिसके कारण जिला प्रशासन ने इलेक्ट्रोरल रजिस्ट्रेशन अफसरों के माध्यम से विभिन्न स्थानों पर कैंप लगाए हैं. इन कैंपों में लोगों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है.
जालंधर में 1.46 लाख मतदाताओं को SIR का नोटिस
एसआईआर सर्वे का पहला चरण 25 जून से तीन अगस्त तक चला. इस दौरान जिले के कुल 16 लाख 49 हजार 946 मतदाताओं के घर-घर जाकर बूथ स्तर के अधिकारियों ने इन्यूमरेशन फॉर्म बांटे. इनमें से करीब 14 लाख 64 हजार 949 लोगों ने फॉर्म जमा कर दिए, जबकि लगभग 1 लाख 84 हजार 997 मतदाताओं तक फॉर्म नहीं पहुंच सके.
मैपिंग न होने पर सत्यापन जरूरी
इन लोगों में से 50 हजार 520 की मृत्यु हो चुकी है, 94 हजार 356 दूसरे स्थानों पर शिफ्ट हो गए हैं, 8 हजार 961 डुप्लीकेट एंट्री पाई गईं, 30 हजार 157 अनुपस्थित या पता न चलने वाले हैं और एक हजार तीन अन्य कारणों से सूची से बाहर रहे.
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ड्राफ्ट मतदाता सूची में 1 लाख 46 हजार 551 ऐसे नाम शामिल हैं जिनकी 2003 की मतदाता सूची से मैपिंग नहीं हो सकी. दूसरे चरण में इन्हीं लोगों को सत्यापन के लिए नोटिस भेजे गए हैं. प्रशासन अलग-अलग तिथियों और जगहों पर कैंप आयोजित कर रहा है. कैंपों में भीड़ इतनी ज्यादा है कि टोकन लेने के बाद भी लोगों को तीन से चार घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है. कई मामलों में 2003 की सूची से मैच नहीं हो पा रहा है या परिवार के दस्तावेजों में गलतियां सामने आ रही हैं, जिससे प्रक्रिया धीमी हो गई है.
अधिकारी बताते हैं कि सही दस्तावेज साथ लेकर आने वाले मतदाताओं का काम जल्दी निपट जाता है. इसलिए नोटिस मिलने वाले लोगों से अपील की गई है कि वे आधार कार्ड, वोटर आईडी, जन्म प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण और पुरानी मतदाता सूची की कॉपी जैसे जरूरी कागजात पहले से तैयार रखकर ही कैंप पहुंचें. इससे न सिर्फ उनका समय बचेगा बल्कि कैंपों में भीड़ भी नियंत्रित रहेगी.